logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

असम की राजनीति में कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई को लेकर तेज अटकल :-

असम की राजनीति में कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई को लेकर तेज अटकलों के बीच यह संकेत मिल रहा है कि उनका भारतीय जनता पार्टी में जाना फिलहाल बेहद असंभावित माना जा रहा है।

हाल के दिनों में उन्होंने गौरव गोगोई और पार्टी नेतृत्व को लेकर गंभीर आपत्तियाँ उठाई हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में उनके अगले कदम को लेकर चर्चाएँ तेज हो गई हैं। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उनके भाजपा में शामिल होने की संभावना बहुत कम बताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे मामले में भाजपा भी सावधानी बरत रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि प्रद्युत बोरदोलोई भाजपा में जाते हैं, तो नगांव लोकसभा सीट की सामाजिक-सियासी गणित पार्टी के लिए जटिल हो सकती है। नगांव को मुस्लिम-बहुल निर्वाचन क्षेत्र माना जाता है, और पहले भी इस सीट की जनसांख्यिकीय संरचना को चुनावी दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील बताया गया है। इसी कारण भाजपा के लिए ऐसा कोई कदम राजनीतिक लाभ के बजाय उलटा असर भी डाल सकता है।यह भी कहा जा रहा है कि पूर्व मंत्री और मौजूदा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई राज्य की राजनीति में भाजपा विधायक के रूप में नई भूमिका लेने के इच्छुक नहीं हैं। उनकी राजनीतिक पहचान राष्ट्रीय स्तर की संसदीय राजनीति से जुड़ी रही है, और इसी वजह से वे विधानसभा की सक्रिय भाजपा राजनीति में जाने के प्रति उत्सुक नहीं दिख रहे। यह आकलन राजनीतिक सूत्रों के दावों और मौजूदा घटनाक्रम से निकाला जा रहा है। इसी बीच, प्रद्युत बोरदोलोई के दिल्ली रवाना होने की खबर ने इस पूरे मामले को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, वह कांग्रेस हाईकमान से मुलाकात कर हालिया विवाद, लाहोरीघाट सीट को लेकर असंतोष, तथा गौरव गोगोई के साथ उभरे मतभेदों पर चर्चा करना चाहते हैं। असम ट्रिब्यून और अन्य रिपोर्टों में भी संकेत है कि लाहोरीघाट सीट विवाद ने असम कांग्रेस के भीतर तनाव को गहरा कर दिया है। समग्र रूप से देखा जाए तो यह घटनाक्रम केवल एक नेता के संभावित दल-बदल की चर्चा भर नहीं है, बल्कि असम कांग्रेस के भीतर बढ़ती खींचतान, नेतृत्व-संकट और चुनाव-पूर्व अस्थिरता का संकेत भी है। ऐसे समय में जब 2026 के असम विधानसभा चुनावों की तैयारी तेज हो रही है, प्रद्युत बोरदोलोई का रुख राज्य की विपक्षी राजनीति पर व्यापक असर डाल सकता है। फिलहाल सबकी नजर दिल्ली में होने वाली बातचीत पर टिकी है, जहाँ से उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अधिक स्पष्ट संकेत मिल सकते हैं।

0
0 views

Comment