बदनावर में साध्वी ऋतंभरा की ओजस्वी धर्मसभा, बोलीं हिंदू जागेगा तो राष्ट्र अजेय रहेगा
बदनावर-धार :- AIMA Raju Gajbhiye (Sitaram) (Social Media Activists)
बदनावर । स्थानीय कृषि उपज मंडी प्रांगण में परम पूज्य साध्वी ऋतंभरा की ओजस्वी धर्मसभा का भव्य आयोजन किया गया। धर्मसभा में नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं द्वारा साध्वी ऋतंभरा का फरसा, तलवार, गदा एवं फोटो फ्रेम भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वी ऋतंभरा ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज दुनिया के कई देशों में युद्ध की स्थिति बनी हुई है, जहां एक-दूसरे को समाप्त करने की प्रवृत्ति दिखाई दे रही है। लेकिन भारत की संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम् की भावना पर आधारित है। उन्होंने कहा कि जिस देश पर भारत का तिरंगा लहरा रहा है, उस पर कोई भी मिसाइल चलाने की हिम्मत नहीं कर सकता, क्योंकि भारत शांति, मित्रता और विश्व कल्याण की भावना में विश्वास रखने वाला राष्ट्र है।
उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा में चींटी को भी दाना देना, चांद को मामा कहना और संपूर्ण विश्व के कल्याण की कामना करना शामिल है। यही भारत की पहचान और उसकी महान संस्कृति है।
दीदी ने समाज में चल रहे षड्यंत्रों और चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि समस्याओं से मुंह मोड़ने से समाधान नहीं निकलता। जैसे किसी रोग पर केवल पाउडर लगाकर उसे छुपाने से इलाज नहीं होता, पहले रोग को समझना पड़ता है, तभी उसका सही उपचार संभव होता है।
उन्होंने केकड़ा प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए कहा कि समाज में कई बार जब कोई व्यक्ति आगे बढ़ने की कोशिश करता है तो लोग उसकी टांग खींचकर उसे पीछे करने लगते हैं। यह प्रवृत्ति समाज और राष्ट्र की प्रगति में बाधक है। हमें एक-दूसरे को आगे बढ़ाने की भावना विकसित करनी होगी।
साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि आज भौतिक समृद्धि बढ़ी है, ऊंची इमारतें बन गई हैं, लेकिन संस्कारों की कमी दिखाई देने लगी है। पहले बच्चे अपने संस्कार और परिचय बताने में भी संकोच करते थे, लेकिन अब समय है कि हम संतों के मार्गदर्शन में जीवन में धर्म और संस्कारों को धारण करें।
उन्होंने कहा कि मनुष्य का जीवन स्थायी नहीं है, जो कुछ भी मिला है वह स्थायी नहीं है। इसलिए हमें अपने जीवन को श्रेष्ठ विचारों, संस्कारों और धर्म के मार्ग पर चलाकर सार्थक बनाना चाहिए।
धर्मसभा के दौरान बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी श्रद्धालु, सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारी एवं नगरवासी उपस्थित रहे, जिससे पूरा मंडी प्रांगण भक्ति और उत्साह के वातावरण से सराबोर रहा।