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बिहार में ​शिक्षा विभाग शर्मसार: " क्यों अररिया में बच्चों की बेंचेस खा गया 'घोटालेबाज' अधिकारी ? क्यों ग़याजी में 19 बर्ष से रिश्वतखोरी का भेंट चढ़

बिहार में ​शिक्षा विभाग शर्मसार:

" क्यों अररिया में बच्चों की बेंचेस खा गया 'घोटालेबाज' अधिकारी ?

क्यों ग़याजी में 19 बर्ष से रिश्वतखोरी का भेंट चढ़ गई शांति कुमारी ?

"बकाया वेतन रोकना,
क्यों है सिस्टम की लाचारी ?

क्या सिस्टम को नहीं पता है मौलिक अधिकारी ?"'

गया | विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार

किशनगंज शिक्षा विभाग में 40 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय घोटाले के मामले में कार्रवाई के बाद अब एक बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है। जब करोड़ों रुपये की अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई हो सकती है, तो गया जिले की महिला शिक्षिका शांति कुमारी को 19 वर्षों से लंबित वेतन अब तक क्यों नहीं मिला?
सूत्रों के अनुसार, शांति कुमारी की नियुक्ति को लेकर विभागीय जांच पहले ही उनके पक्ष में जा चुकी है। जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित जांच रिपोर्ट में भी उनकी नियुक्ति को वैध माना गया है। इसके बावजूद भी अब तक वेतन भुगतान क्यों नहीं किया गया?

यह मामला केवल एक शिक्षक के वेतन का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और व्यवस्था की संवेदनशीलता का भी प्रश्न बन गया है।

किशनगंज: डीपीओ पर 40 करोड़ का घोटाला
किशनगंज शिक्षा विभाग में बेंच-डेस्क, विद्यालय जीर्णोद्धार और प्री-फैब्रिकेटेड भवन निर्माण से जुड़ी योजनाओं में भारी वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया था। जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद तत्कालीन डीपीओ के खिलाफ कार्रवाई की गई और उनकी पेंशन में 25 प्रतिशत की कटौती का आदेश दिया गया।
बड़ा सवाल
जब करोड़ों रुपये के घोटाले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई संभव है, तो:
एक महिला शिक्षक का 19 वर्षों का वेतन क्यों रोका गया?
जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय क्यों नहीं की जा रही?
आदेश और जांच रिपोर्ट के बावजूद भुगतान क्यों लंबित है?

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