बोगस 'शालार्थ' आईडी घोटाला: महाराष्ट्र में शिक्षा विभाग का बड़ा पर्दाफाश, 1000 से ज्यादा शिक्षकों पर गिर सकती है गाज!
जलगांव/नाशिक:
महाराष्ट्र के शिक्षा जगत में फर्जी 'शालार्थ आईडी' (Shalarth ID) के जरिए शिक्षकों की भर्ती करने वाले एक बहुत बड़े गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। SIT (विशेष जांच दल) की जांच में अकेले जलगांव जिले से 1004 शिक्षकों के नाम सामने आए हैं, जिनकी नियुक्तियां संदिग्ध पाई गई हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि जांच आगे बढ़ने पर यह आंकड़ा तीन गुना तक बढ़ने की संभावना है।
प्रमुख अधिकारियों पर भी गिरी बिजली
इस घोटाले की आंच केवल शिक्षकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि विभाग के बड़े अधिकारी भी इसके लपेटे में हैं।
जांच रिपोर्ट के अनुसार:
तत्कालीन शिक्षा अधिकारी नितीन बच्छाव और उपसंचालक बी. बी. चव्हाण के हस्ताक्षरों और रिमार्क (Remarks) के आधार पर ही ये फर्जी नियुक्तियां की गई थीं। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से इन नियुक्तियों को "दोषपूर्ण" करार दिया गया है। सबसे बड़ा उलटफेर तब हुआ जब इस मामले में शिकायत दर्ज कराने वाले अधिकारी भाऊसाहेब चव्हाण खुद ही जांच के घेरे में आ गए और उन पर भी मामला दर्ज किया गया है।
कैसे हुआ इस 'महा-घोटाले' का खुलासा?
नाशिक की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को सौंपी गई रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं:
दस्तावेजों में हेराफेरी: शैक्षणिक संस्थानों के नियुक्ति आदेश, शालार्थ ड्राफ्ट और सरकारी रिकॉर्ड के बीच कोई मेल नहीं मिल रहा है। 35 से ज्यादा संस्थाएं रडार पर: जलगांव की 35 से अधिक शिक्षण संस्थाओं ने मिलीभगत कर इन शिक्षकों को अवैध रूप से सिस्टम में शामिल किया। अधूरा रिकॉर्ड: जांच के दौरान पाया गया कि कई शिक्षकों की जानकारी सरकारी पोर्टल पर अधूरी है या दस्तावेजों में भारी अंतर (Mismatch) है।
SIT की कार्रवाई से मचा हड़कंप
SIT ने पहली बार इतनी बड़ी संख्या में संदिग्ध शिक्षकों की सूची तैयार की है। नाशिक के भद्रकाली पुलिस स्टेशन में दर्ज पहले मामले के बाद, दो साल की गहन जांच ने जिला परिषद और नगर पालिका के शिक्षा अधिकारियों सहित संस्था संचालकों की नींद उड़ा दी है।
"जांच का दायरा बढ़ रहा है और संभावना है कि आने वाले दिनों में यह संख्या 3,000 के पार पहुंच सकती है। दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी शुरू हो चुकी है।"