तथ्यों की कसौटी पर राहुल गांधी: दिल्ली विश्वविद्यालय ने 'जातिगत भेदभाव' के दावों को बताया भ्रामक और गैर-जिम्मेदाराना
नई दिल्ली | 15 मार्च, 2026
कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी एक बार फिर अपने बयानों के कारण विवादों में घिर गए हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने राहुल गांधी द्वारा लगाए गए 'जातिगत भेदभाव' के आरोपों को पूरी तरह से 'तथ्यहीन' और 'भ्रामक' करार देते हुए उन्हें आईना दिखाया है।
क्या था राहुल गांधी का आरोप?
राहुल गांधी ने बिना किसी ठोस सबूत के दावा किया था कि दिल्ली विश्वविद्यालय में इंटरव्यू (साक्षात्कार) की प्रक्रिया का उपयोग अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों को "सिस्टम से बाहर" करने के लिए किया जाता है। उन्होंने इस प्रक्रिया को भेदभावपूर्ण बताते हुए विश्वविद्यालय की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे।
तथ्यों के सामने टिक नहीं सके दावे
DU प्रशासन ने एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर राहुल गांधी के दावों की धज्जियाँ उड़ा दीं। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि:
पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया: स्नातक (UG) पाठ्यक्रमों में प्रवेश CUET (Common University Entrance Test) के अंकों के आधार पर पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी तरीके से होता है। इसमें किसी भी छात्र का इंटरव्यू नहीं लिया जाता।
अज्ञानता का प्रदर्शन: जानकारों का कहना है कि जब प्रवेश प्रक्रिया में इंटरव्यू होता ही नहीं, तो भेदभाव का आरोप लगाना केवल "राजनीतिक अज्ञानता" का परिचय देता है।
संस्थानों को बदनाम करने की कोशिश: DU के रजिस्ट्रार ने कहा कि इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयान देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खराब करने की एक सोची-समझी कोशिश है।
विशेषज्ञों की राय: 'सामाजिक न्याय' के नाम पर भ्रम?
शिक्षाविदों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी तथ्यों की जांच किए बिना केवल 'वोट बैंक' की राजनीति के लिए छात्रों के बीच जातिगत विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।
"एक जिम्मेदार नेता को राष्ट्रीय संस्थानों पर कीचड़ उछालने से पहले डेटा और प्रक्रियाओं को समझना चाहिए। बिना इंटरव्यू वाली प्रवेश प्रक्रिया पर भेदभाव का आरोप लगाना हास्यास्पद है।" — एक वरिष्ठ शिक्षाविद्
संसद में सरकार का पलटवार
सदन में भी सत्ता पक्ष ने राहुल गांधी को घेरते हुए कहा कि वे युवाओं को गुमराह कर रहे हैं। मंत्रियों ने मांग की है कि राहुल गांधी को अपनी इस "गलत जानकारी" के लिए विश्वविद्यालय के लाखों छात्रों और प्रशासन से माफी मांगनी चाहिए।