आखिर रात के खनन कारोबार में उत्तराखंड को राजस्व का पलीता लगाने में किसका हाथ है,, खनन विभाग के सचिन लेखा से बड़ा सवाल
ढकरानी में राजस्व की आड़ में किसका 'राज' चल रहा है?
👉विधायक मुन्ना सिंह चौहान से लेकर सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत तक जिस अवैध खनन पर सवाल उठा चुके हैं, क्या ढकरानी में उसे 'CCTV की नजर' से बचाने की कोशिश हो रही है? रात के अंधेरे में बिना रॉयल्टी का माल और विभागीय चुप्पी..आखिर किसको बचाने की कोशिश है
👉ढकरानी क्रेशर जोन: बढ़ते राजस्व की आड़ में 'अंधेरे का खेल', क्या जन प्रतिनिधियों की चेतावनी भी हुई बेअसर?
विकासनगर (इंद्रपाल सिंह): उत्तराखंड में खनन राजस्व में रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी के दावों के बीच, विकासनगर का ढकरानी क्रेशर जोन एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सरकार को केंद्र से मिल रही शाबाशी और बढ़ते राजस्व के आंकड़ों के पीछे का सच धरातल पर कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है। ताजा सुगबुगाहट यह है कि ढकरानी के कुछ स्टोन क्रशरों पर रात के सन्नाटे में बिना रॉयल्टी के आरबीएम (रेत-बजरी) खपाने का बड़ा खेल चल रहा है।
👉हैरानी की बात यह है कि क्षेत्र में अवैध खनन की पुष्टि स्वयं सत्ता पक्ष के जिम्मेदार लोग कर चुके हैं। भाजपा विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने समय-समय पर ढकरानी और आसपास के क्षेत्रों में अवैध खनन के विरुद्ध आवाज उठाई है
👉वहीं, सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने तो संसद में इस मुद्दे को उठाकर यह स्पष्ट कर दिया था कि प्रदेश में अवैध खनन एक गंभीर चुनौती है। जब इतने बड़े जन प्रतिनिधि स्वयं इस सच्चाई को स्वीकार कर चुके हैं, तो प्रशासन का 'सब ठीक है' वाला रवैया समझ से परे है।
👉25% सरकारी खजाना, 75% माफिया की जेब?
चर्चा है कि नदियों से जितनी खनिज संपदा निकाली जा रही है, उसका एक चौथाई हिस्सा भी सरकारी खजाने तक नहीं पहुँच रहा। बढ़ता राजस्व केवल एक 'पर्दा' है, जिसके पीछे बिना रॉयल्टी के माल खपाने का सिंडिकेट सक्रिय है✍️