सड़क पर होली मनाई जाती है।
सड़क पर दिवाली भी मनाई जाती है।
सड़क पर होली मनाई जाती है।
सड़क पर दिवाली भी मनाई जाती है।
सड़क पर कांवड़ यात्रा निकलती है।
सड़क पर शोभायात्रा भी निकलती है।
नवरात्रि में सड़क पर रामलीला भी होती है।
लेकिन जब मस्जिद या ईदगाह में जगह कम होने की वजह से मुसलमान सड़क पर नमाज़ पढ़ लेते हैं, तो उनके खिलाफ FIR दर्ज कर दी जाती है।
सरकार कांवड़ यात्रियों पर हेलीकॉप्टर से फूल बरसाती है, लेकिन जब मुसलमान मजबूरी में सड़क पर नमाज़ पढ़ते हैं तो उन पर लाठीचार्ज किया जाता है।
कभी-कभी तो पुलिस घर में नमाज़ पढ़ने वालों पर भी FIR कर देती है। अगर किसी घर में 8-10 दोस्त या रिश्तेदार मिलकर नमाज़ पढ़ लें, तब भी मामला दर्ज कर लिया जाता है।
अगर भारत का लोकतंत्र सबको बराबरी का अधिकार देता है, तो मुसलमानों के लिए कानून अलग क्यों लगता है?
मुसलमानों के साथ भेदभाव क्यों होता है?