असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंता बिस्वा सरमा ने पश्चिम बंगाल में कथित अवैध घुसपैठ के मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला है।
उन्होंने यह बयान 12 मार्च को आयोजित ‘पंचायत आजतक’ कार्यक्रम में दिया, जहां उन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमावर्ती राज्यों की जनसांख्यिकीय स्थिति को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की।अपने संबोधन में सरमा ने कहा कि यदि अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो इतिहास ममता बनर्जी को माफ नहीं करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठ लंबे समय से एक गंभीर समस्या बनती जा रही है और यदि इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो इसका दूरगामी प्रभाव राज्य की सामाजिक और जनसांख्यिकीय संरचना पर पड़ सकता है। असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने असम में अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए कई कड़े कदम उठाए हैं। इनमें सीमा सुरक्षा को मजबूत करना, संदिग्ध नागरिकों की पहचान की प्रक्रिया, और प्रशासनिक निगरानी को सख्त करना शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि पश्चिम बंगाल में भी असम की तरह सख्त नीतियां लागू नहीं की गईं, तो आने वाले वर्षों में राज्य की जनसंख्या संरचना में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सरमा ने विशेष रूप से यह चेतावनी दी कि यदि मौजूदा स्थिति जारी रही, तो अगले 20 वर्षों में पश्चिम बंगाल में बंगाली हिंदुओं को गंभीर जनसांख्यिकीय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म दे दिया है और यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है। विश्लेषकों का मानना है कि अवैध घुसपैठ का मुद्दा लंबे समय से पूर्वोत्तर भारत और पूर्वी राज्यों की राजनीति का एक प्रमुख विषय रहा है। असम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में सीमा से लगे क्षेत्रों के कारण यह समस्या अक्सर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का केंद्र बनती रही है। सरमा के इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। एक ओर जहां भाजपा नेताओं ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा मुद्दा बताया, वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि यह बयान राजनीतिक लाभ के लिए दिया गया है। आने वाले समय में यह मुद्दा सीमा सुरक्षा, घुसपैठ और जनसांख्यिकीय संतुलन को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक राजनीतिक चर्चा को जन्म दे सकता है।