नगर परिषद में सी एम ओ की हठधर्मिता या फिर जनप्रतिनिधियों की मनमानी ..?
डिंडोरी -- नगर परिषद डिंडोरी में आए दिन अनियमितताओं के मामले सामने आते रहते है ,लेकिन बावजूद इसके कोई सुधार नजर नहीं आता । अब इसे मुख्य नगर पालिका अधिकारी डिंडोरी की हठधर्मिता कहें या फिर जनता - जनार्दन द्वारा जिले में चुने गए जनप्रतिनिधियों की मनमानी। क्यों कि नवीन परिषद के गठन से पूर्व जो उम्मीदें शहर के नागरिकों ने वार्ड जनप्रतिनिधियों को चुनते वक्त लगाई थी ,वह कहीं से भी पूरी होती नजर नहीं आती।शहर के वार्ड क्रमांक 1 से लेकर वार्ड क्रमांक 15 तक चहुओर गंदगी के ढेर , तालाबों पर कब्जा और निर्माण कार्यों में लापरवाही आप प्रायः सभी वार्डों में देख सकते है। आलम यह कि जहां विकास की इबारतें लिखी जानी चाहिए वहां कोई विकास नजर नहीं आता। और जहां आवश्यकता नहीं है वहां विकास ही विकास, किसके इशारे पर ? क्यों कि जनप्रतिनिधि मुख्य नगर पालिका अधिकारी पर दोष मढ़ते है तो मुख्य नगर पालिका अधिकारी की खामोशी भी बहुत कुछ कह जाती है।लेकिन इतना जरूर है शहर का विकास हुआ हो अथवा न हुआ हो । कुछ वार्डों के पार्षद पतियों और जनप्रतिनिधियों को रोजगार अवश्य मिल गया है। किसी के ट्रैक्टर सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं तो किसी ने निर्माण कार्यों की खानापूर्ति के नाम पर मैटेरियल सप्लायर का कार्य जारी रखा हुआ है।और शहर आज भी पूर्व की भांति विकास की बाट जोह रहा है।
वाहन स्वामी पर मेहरबानी या स्वयं स्वार्थ -- फिलहाल शहर में चर्चा तो उस वाहन की भी है ,जिसमें साहब तफरी पर निकलते है। क्यों कि उक्त वाहन के लिए भी नियम - कायदों को दरकिनार रखा गया है। अब नियमों का पाठ पढ़ाने वाले साहब ने ऐसा क्यों किया यह तो वही जाने , लेकिन इतना जरूर है कि उक्त वाहन के स्वामी पर साहब मेहरबान जरूर है।और यह मेहरबानी कब तलक और क्यों रहेगी ,इसका जवाब भी साहब और जनप्रतिनिधियों को है।फिर साहब ने ट्रैक्टर भी लगा रखे है। अरे जब परिषद में कर्मचारियों के वेतन के लाले है तो फिर फिजूलखर्ची किस बात की..?
क्या कर रही पी आई सी ..? -- शहरवासियों की जानकारी के लिए बता दूं कि परिषद की हर एक गतिविधि पर पी आई सी की निगरानी होती है ,जिसमें तमाम निर्णयों उपरांत ही कोई आदेश जारी किया जाता है। तो परिषद की इस फिजूलखर्ची और घपले - घोटालों पर खामोशी क्यों..? संभवतः स्वयं स्वार्थ में लिप्त जनप्रतिनिधियों के पास इस बात का कोई जवाब न हो।शहर के वार्ड क्रमांक 1 की सड़क विगत ढाई वर्षों से कार्यादेश जारी होने के बावजूद अटकी पड़ी है, वार क्रमांक चार और पांच के बीच भारत माता चौक से कन्या शाला तक बनने वाली व्यस्ततम सड़क गड्ढों में तब्दील हो गई ,लेकिन सड़क वार्ड क्रमांक 12 में तैयार हो गई वह भी जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि के स्वयं स्वार्थ में ?
रोहित ने दिखाये तारे -- फ्लेक्स टेंडर में की गई मनमानी इतनी भारी पड़ेगी यह ख़्याल न मुख्य नगर पालिका अधिकारी के जेहन में आया और ना ही जनप्रतिनिधियों के ? जी हा फ्लेक्स टेंडर में शामिल रोहित फ्लेक्स के संचालक ने नगर परिषद डिंडोरी के खिलाफ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जंग तो छेड़ी ही साथ ही संयुक्त संचालक नगरीय निकाय से लेकर नगरीय प्रशासन भोपाल और मंत्री - मिनिस्टरों तक घपले - घोटालों के दस्तावेजों के साथ लंबी - चौड़ी शिकायतें कर डाली है , जिसके चलते संपूर्ण परिषद को दिन में ही तारे नजर आने लगे है। सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि स्थिति बिगड़ते देख फ्लेक्स टेंडर को निरस्त कर दिया गया है।
बहरहाल स्थिति देख यही कहा जा सकता है कि उक्त मामले में जिला प्रशासन द्वारा विशेष जांच दल गठित कर गहनता से जांच कराई जानी चाहिए ,ताकि दोषियों पर कार्यवाही कर शहरी विकास को गति दी जा सके ।