लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद की कार्यवाही के दौरान स्पष्ट किया कि संसद में बोलने का अधिकार हर सदस्य को है :-
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद की कार्यवाही के दौरान स्पष्ट किया कि संसद में बोलने का अधिकार हर सदस्य को है, लेकिन यह अधिकार केवल निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार ही प्रयोग किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि चाहे वह सदन के नेता हों, विपक्ष के नेता हों या कोई मंत्री—सभी को संसद के स्थापित नियमों का पालन करना अनिवार्य है। लोकसभा अध्यक्ष ने इस धारणा को भी खारिज किया कि विपक्ष के नेता को किसी भी विषय पर बोलने के लिए कोई विशेष या अतिरिक्त अधिकार प्राप्त है। उन्होंने कहा कि संसद की कार्यवाही संविधान, नियमों और संसदीय परंपराओं के आधार पर संचालित होती है और इनमें किसी भी सदस्य को विशेषाधिकार प्राप्त नहीं है। ओम बिरला ने जोर देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सदन की गरिमा और अनुशासन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि सभी सदस्य नियमों के अनुरूप अपनी बात रखते हैं तो संसद में स्वस्थ और रचनात्मक चर्चा संभव हो पाती है। उन्होंने यह भी कहा कि सदन का प्रत्येक सदस्य समान अधिकार रखता है, लेकिन इन अधिकारों के साथ जिम्मेदारियों का पालन करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।स्पीकर ने कहा कि संसद देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है और यहां होने वाली चर्चा पूरे देश के लिए मार्गदर्शक होती है। इसलिए आवश्यक है कि सभी सांसद नियमों का सम्मान करें और सदन की कार्यवाही को व्यवस्थित तथा गरिमापूर्ण बनाए रखने में सहयोग दें।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्पीकर ओम बिरला का यह बयान संसद में हाल के दिनों में हुई तीखी बहस और व्यवधानों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके इस वक्तव्य को संसदीय अनुशासन बनाए रखने और नियमों की सर्वोच्चता को पुनः स्थापित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। संसदीय मामलों के जानकारों के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष का यह संदेश स्पष्ट रूप से इस बात को रेखांकित करता है कि लोकतंत्र में अधिकार और नियम साथ-साथ चलते हैं, और संसद की सुचारू कार्यवाही के लिए सभी दलों और सदस्यों का सहयोग आवश्यक है।