जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (जेकेसीए) :-
जम्मू-कश्मीर की एक अदालत ने जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (जेकेसीए) से जुड़े कथित घोटाले के मामले में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता डॉ. फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (नॉन-बेलेबल वारंट) जारी किया है।
यह आदेश अदालत द्वारा उस समय जारी किया गया जब वह निर्धारित सुनवाई के दौरान अदालत में उपस्थित नहीं हुए। यह मामला जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन में कथित वित्तीय अनियमितताओं और धन के दुरुपयोग से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि जेकेसीए के अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान क्रिकेट के विकास के लिए आवंटित धनराशि में गंभीर गड़बड़ियां की गईं और कई करोड़ रुपये के फंड का कथित रूप से गलत तरीके से उपयोग या हेरफेर किया गया। सूत्रों के अनुसार यह मामला कई वर्षों से जांच के दायरे में है और इसमें विभिन्न वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों तथा प्रशासनिक निर्णयों की गहन जांच की गई है। जांच एजेंसियों का दावा है कि क्रिकेट विकास के लिए जारी की गई राशि का एक हिस्सा निर्धारित उद्देश्यों के बजाय अन्य माध्यमों में स्थानांतरित किया गया। अदालत द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट के बाद इस मामले में कानूनी और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अदालत के समक्ष आरोपी की उपस्थिति सुनिश्चित नहीं होती है तो इस प्रकार के वारंट जारी किए जाते हैं ताकि न्यायिक प्रक्रिया बाधित न हो। फारूक अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर की राजनीति का एक प्रमुख चेहरा रहे हैं और कई बार राज्य के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। उनके खिलाफ जारी इस वारंट के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आने की संभावना है। विपक्षी दल इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से उठा सकते हैं, जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस की ओर से इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।.विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला जम्मू-कश्मीर के हाल के वर्षों के सबसे चर्चित वित्तीय मामलों में से एक रहा है। अदालत की इस कार्रवाई के बाद अब सभी की निगाहें आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच एजेंसियों की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।