सबसे गरीब राज्यसभा उम्मीदवार निकले नीतीश कुमार, जानिए कौन है सबसे अमीर प्रत्याशी
श्री अमरेन्द्र धारी सिंह राजद से राज्यसभा उम्मीदवार, ख़ानदानी भूमिहार नेता की प्रतिष्ठा दांव पर, भाजपा को पटखनी देने की रणनीति तैयार। पढ़िए धारी राजपरिवार के बारे में पुरा, बिहार की राजनीति और समाज में कुछ नाम केवल व्यक्ति नहीं होते, बल्कि एक लंबे इतिहास और परंपरा के प्रतीक होते हैं। श्री अमरेन्द्र धारी सिंह उसी परंपरा के प्रतिनिधि माने जाते हैं। इतिहासकारों और स्थानीय परंपराओं के अनुसार 14वीं शताब्दी में कोंकण, महाराष्ट्र क्षेत्र से उपजाऊ भूमि की तलाश में चितपावन ब्राह्मण श्री न्याय भट्ट बिहार के पालीगंज (पटना) क्षेत्र में आए। कालांतर में उनके वंशज शेरशाह सूरी के समय सैन्य नेतृत्व में उभरे और इस क्षेत्र में अपना प्रभाव स्थापित किया। आगे चलकर यही वंश ‘धारी राजपरिवार’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। मुगल काल हो या अंग्रेज़ी शासन, इस परिवार की सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिष्ठा कायम रही। इसी गौरवशाली परंपरा के वंशज बाबू श्री अमरेन्द्र धारी सिंह ने आधुनिक दौर में भी अपनी अलग पहचान बनाई। दिल्ली के प्रतिष्ठित किरोड़ी मल कॉलेज से स्नातक करने के बाद उन्होंने उर्वरक (फर्टिलाइज़र) व्यापार में कदम रखा और इस क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपना नाम स्थापित किया। राजनीतिक जीवन में भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। सन् 2020 में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के समर्थन से वे राज्यसभा सदस्य बने। वर्तमान समय में वे पुनः राजनीतिक चर्चा के केंद्र में हैं। अपने राजनीतिक जीवन में कई जांच-पड़ताल और दबावों का सामना करने के बावजूद वे अपने सामाजिक आधार और पारिवारिक विरासत के कारण निरंतर चर्चा में बने रहे। व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो अमरेन्द्र धारी सिंह अपने सादगीपूर्ण और स्वतंत्र जीवन के लिए भी जाने जाते हैं। वे अविवाहित हैं और अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा समाज सेवा तथा विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क आवासीय शिक्षा जैसे कार्यों में लगाते हैं।
धारी राजपरिवार का इतिहास आज भी भरतपुरा लाइब्रेरी जैसे ऐतिहासिक स्रोतों में दर्ज बताया जाता है, जो इस परिवार की दीर्घकालीन सामाजिक उपस्थिति का प्रमाण माना जाता है। राजनीति में जीत और हार अपनी जगह है, लेकिन यह भी सच है कि सात सौ वर्षों की परंपरा और सामाजिक पहचान किसी एक चुनाव से तय नहीं होती।