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सिद्धार्थनगर: नौतला सरपतहा में चकबंदी प्रक्रिया पूर्ण होने के करीब, धारा-52 के प्रस्ताव से पूर्व DM ने लिया फीडबैक:

सिद्धार्थनगर के शोहरतगढ़ तहसील के नौतला सरपतहा गांव में चकबंदी प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। बुधवार (11 मार्च) को धारा-52 का प्रस्ताव चकबंदी निदेशालय भेजने से पहले जिलाधिकारी एवं जिला उप संचालक चकबंदी शिवशरणप्पा जी.एन. की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में चकबंदी की प्रगति, ग्रामीणों को हुए लाभ और उनकी संतुष्टि पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में अपर जिलाधिकारी (न्याय) डॉ. ज्ञान प्रकाश, उप जिलाधिकारी शशांक शेखर राय तथा उप जिलाधिकारी शोहरतगढ़ विवेकानंद मिश्र सहित तहसील व चकबंदी विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। नौतला सरपतहा गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने जिलाधिकारी का गर्मजोशी से स्वागत किया।
इस दौरान जिलाधिकारी ने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर चकबंदी प्रक्रिया से जुड़ी समस्याएं और सुझाव सुने। अधिकांश ग्रामीणों ने चकबंदी प्रक्रिया पर संतोष व्यक्त करते हुए बताया कि खेतों के बिखराव की समस्या खत्म होने से खेती करना अब पहले की तुलना में अधिक आसान हो गया है और कृषि कार्य में सुविधा बढ़ी है।
जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन. ने बताया कि नौतला सरपतहा गांव की चकबंदी प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और अब धारा-52 के तहत प्रस्ताव चकबंदी निदेशालय को भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव भेजने से पहले यह जानना जरूरी था कि ग्रामीणों को चकबंदी से क्या लाभ मिला और वे इस प्रक्रिया से कितने संतुष्ट हैं, इसी उद्देश्य से यह बैठक आयोजित की गई।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम की धारा-4(2) के अंतर्गत प्रथम चक्र की चकबंदी के लिए निदेशालय के पत्र संख्या 2298/जी-610/2012 दिनांक 27 मई 2016 के आधार पर सरकारी गजट में विज्ञप्ति प्रकाशित की गई थी। इसके बाद 12 जुलाई 2017 को ग्राम के अभिलेख तहसील शोहरतगढ़ से चकबंदी विभाग को प्राप्त हुए और चकबंदी समिति का गठन कर प्रक्रिया शुरू की गई।
ग्राम में धारा-7 का प्रकाशन 22 मार्च 2018, धारा-8 का प्रकाशन 30 मई 2018, धारा-9 का प्रकाशन 30 जून 2019 तथा धारा-10 का प्रकाशन 31 जुलाई 2019 को किया गया। इसके बाद सहायक चकबंदी अधिकारी द्वारा चक निर्माण की कार्यवाही पूरी कर धारा-20 के अंतर्गत 1 जून 2020 को प्रारंभिक चकबंदी योजना प्रस्तावित की गई।
प्रस्तावित चकों के खिलाफ कुछ चकदारों ने चकबंदी अधिकारी के समक्ष आपत्तियां दर्ज कराईं, जिनका निस्तारण किया गया। इसके बाद कुछ चकदारों ने बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी के समक्ष अपील की, जिसका निस्तारण अपीलीय न्यायालय द्वारा किया गया। अंततः धारा-23 के तहत ग्राम की प्रारंभिक चकबंदी योजना का पुष्टिकरण 18 मई 2022 को किया गया।
इसके बाद धारा-24 के अंतर्गत चक सीमांकन और कब्जा परिवर्तन की प्रक्रिया 19 अप्रैल 2022 से शुरू होकर 20 मई 2022 को पूरी कर ली गई। वर्तमान में ग्राम के सभी चकदार अपने-अपने नए चकों पर खेती कर रहे हैं।
जिलाधिकारी ने बताया कि 21 मई 2022 से 29 दिसंबर 2025 तक ग्राम के अंतिम अभिलेखों की तैयारी की गई,
जिसमें जोत चकबंदी आकार पत्र-41, 45 तथा अंतिम भू-चित्र तैयार किए गए। ये अभिलेख 27 फरवरी 2026 को बंदोबस्त माल अभिलेखागार और तहसील में जमा कर दिए गए हैं। साथ ही जोत चकबंदी आकार पत्र-45 के उद्धरण सभी चकदारों को वितरित कर दिए गए और धारा-27 का लक्ष्य 29 दिसंबर 2025 को प्राप्त कर लिया गया।
चकबंदी के बाद ग्राम में राजस्व भूमि में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा-77 से संबंधित भूमि पहले 1.1840 हेक्टेयर थी, जो अब बढ़कर 20.3900 हेक्टेयर हो गई है। वहीं धारा-59 के अंतर्गत नवीन परती और बंजर भूमि 0.3120 हेक्टेयर से बढ़कर 3.3060 हेक्टेयर हो गई है।
बैठक के अंत में ग्राम प्रधान डेल्लू, चकबंदी समिति के सदस्य हजरत अली, सुंदर और पंचम सहित ग्रामवासी मुबारक अली, रामभरोसे, अकबर हुसैन, राममनोहर और अनवर हुसैन ने जिलाधिकारी व चकबंदी विभाग के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया और चकबंदी प्रक्रिया के प्रति अपनी संतुष्टि व संस्तुति जाहिर की। अब जनपद स्तर से धारा-52 का प्रस्ताव चकबंदी निदेशालय को भेजा जाएगा, जिसके बाद गांव में चकबंदी प्रक्रिया आधिकारिक रूप से समाप्त कर दी जाएगी।

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