सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार निष्क्रिय इच्छामृत्यु को दी अनुमति
देश की सर्वोच्च अदालत Supreme Court of India ने एक ऐतिहासिक फैसले में पहली बार निष्क्रिय इच्छामृत्यु यानी पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दे दी है। अदालत ने यह आदेश अपने पहले के ऐतिहासिक फैसले Common Cause vs Union of India के प्रावधानों के तहत दिया है।
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि गंभीर और असाध्य बीमारी से जूझ रहे मरीजों के मामले में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी जा सकती है।
अदालत ने अपने 2018 के कॉमन कॉज फैसले का हवाला दिया, जिसमें गरिमा के साथ मरने के अधिकार को संविधान के तहत मौलिक अधिकार माना गया था। इस फैसले में 2023 में कुछ संशोधन भी किए गए थे ताकि प्रक्रिया को और स्पष्ट व सरल बनाया जा सके।
कोर्ट ने कहा कि यदि मरीज ने पहले से “लिविंग विल” या एडवांस डायरेक्टिव तैयार की है, तो उसके आधार पर चिकित्सा उपचार रोकने या जीवन रक्षक उपकरण हटाने जैसे निर्णय लिए जा सकते हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारत में मरीजों के अधिकार और मानवीय गरिमा से जुड़े मुद्दों पर एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।