Sufi delegation at IRANIAN EMBASSY
प्रेस विज्ञप्ति
10/03/2026
नई दिल्ली / अजमेर शरीफ
अजमेर शरीफ के सूफी प्रतिनिधिमंडल ने ईरान कल्चर हाउस और ईरानी दूतावास जाकर जताई संवेदना
अजमेर शरीफ स्थित हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती (गरीब नवाज़) की दरगाह और भारत की अन्य प्रमुख दरगाहों से आए एक सूफी आध्यात्मिक प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में ईरान कल्चर हाउस तथा बाद में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के दूतावास जाकर हज़रत ग्रैंड आयतुल्लाह इमाम अली ख़ामेनेई की शहादत पर गहरी संवेदना व्यक्त की।
इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व हाजी सैयद सलमान चिश्ती, गद्दी नशीन – दरगाह अजमेर शरीफ ने किया।
ईरान कल्चर हाउस में प्रतिनिधिमंडल ने भारत में ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि हुज्जतुल इस्लाम हकीम इलाही से मुलाकात की। इस दौरान शैख ज़ियाई, सांस्कृतिक काउंसलर – ईरानी दूतावास और प्रमुख, ईरान कल्चर हाउस, नई दिल्ली भी मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल ने वहां अपनी संवेदनाएँ व्यक्त कीं।
इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने ईरान के दूतावास में जाकर इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के डिप्टी हाई कमिश्नर महामहिम डॉ. आगा हुसैनी साहब से मुलाकात की और आधिकारिक कंडोलेंस बुक में अपने संदेश दर्ज किए।
इस सूफी प्रतिनिधिमंडल में हाजी सैयद सलमान चिश्ती, सैयद मेहराज चिश्ती, सैयद दानिश अली, सैयद नूर चिश्ती, सैयद नदीम चिश्ती शामिल थे। दिल्ली की ऐतिहासिक सूफी दरगाहों से भी प्रतिनिधि मौजूद रहे, जिनमें सैयद जावेद क़ुतबी (दरगाह हजरत कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी), सैयद अनफल निज़ामी (दरगाह हजरत निजामुद्दीन औलिया), सैयद दानिश नसीरी चिश्ती (दरगाह हजरत नसीरुद्दीन चिराग़-ए-दिल्ली), सैयद सादिक हुसैनी और अन्य सदस्य शामिल थे।
इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल और ईरानी प्रतिनिधियों के बीच सम्मान और एकजुटता के साथ विचारों का आदान-प्रदान हुआ। सभी ने मिलकर विश्व शांति के लिए दुआ की और विशेष रूप से ईरान के बच्चों, महिलाओं, बुज़ुर्गों तथा युद्ध और हिंसा से प्रभावित सभी नागरिकों की सुरक्षा की प्रार्थना की।
इस मौके पर हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने कहा कि भारत और ईरान के बीच सदियों पुराने आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध रहे हैं, जिन्होंने दोनों देशों की साझा सभ्यता और आध्यात्मिक विरासत को समृद्ध किया है।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि दुनिया को निर्दोष लोगों के खिलाफ होने वाली हिंसा और युद्ध अपराधों की कड़ी निंदा करनी चाहिए, और विश्व नेताओं को न्याय, संयम और शांतिपूर्ण संवाद के मार्ग को अपनाना चाहिए।
अंत में अजमेर शरीफ की पवित्र दरगाह से उनके अनुयायियों के लिए सब्र, और ईरान सहित पूरी दुनिया में अमन, स्थिरता और इंसानियत की भलाई के लिए दुआ की गई।