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फौजी परिवारों की समस्याओं पर बड़ा एक्शन: मुख्यमंत्री कार्यालय ने DGP को दिए कार्रवाई के निर्देश

"नमस्कार, मैं इलाही एमा मीडिया और आप देख रहे हैं आज की बड़ी खबर। देश की सीमाओं पर तैनात हमारे जांबाज सैनिकों के परिवारों को अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। पूर्व सैनिक, इलाही मोहम्मद द्वारा प्रधानमंत्री और गृह मंत्री मुख्यमंत्री वित्तमंत्री को लिखे गए पत्र पर प्रशासन अब हरकत में आ गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से लेते हुए सीधे पुलिस महानिदेशक (DGP) को पत्र भेजकर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।"
​अक्सर देखा जाता है कि जब एक जवान देश की सुरक्षा में शून्य से नीचे के तापमान या घने जंगलों में तैनात होता है, तब पीछे उसका परिवार जमीन-जायदाद, बच्चों के एडमिशन और राशन कार्ड जैसे प्रशासनिक कार्यों के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाता रहता है। इसी समस्या को लेकर पूर्व सैनिक इलाही मोहम्मद ने एक विशेष मांग उठाई थी।
​पत्र में उठाई गई प्रमुख मांगें:
​अनिवार्य प्राथमिकता प्रणाली: सभी सरकारी फॉर्म और पोर्टल्स ऑनलाइन ऑफलाइन पर 'सेवारत सैनिक/पैरामिलिट्री/पेंशनर' के लिए एक अलग कॉलम जोड़ा जाए ताकि उनके कार्यों को प्राथमिकता मिले।
​नोडल अधिकारियों की नियुक्ति: हर जिले में एक समर्पित 'सैनिक सहायता नोडल अधिकारी' की तैनाती हो, जो फौजी परिवारों की शिकायतों का समयबद्ध समाधान कर सके।
​फास्ट ट्रैक समाधान: सैनिक परिवारों के आवेदनों को 'अति-महत्वपूर्ण' श्रेणी में रखकर 7 से 15 दिनों के भीतर निपटारा किया जाए।
​शासन का रुख:
​मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस पत्र पर संज्ञान लेते हुए इसे आगे की कार्यवाही के लिए पुलिस विभाग और संबंधित अधिकारियों को प्रेषित कर दिया है। छत्तीसगढ़ सरकार के इस कदम से न केवल पूर्व सैनिकों बल्कि वर्तमान में सीमाओं पर तैनात लाखों जवानों के मन में एक सुरक्षा का भाव जागेगा।

"इलाही मोहम्मद की इस पहल और सरकार की त्वरित प्रतिक्रिया ने यह साबित कर दिया है कि राष्ट्र के रक्षकों का सम्मान केवल नारों तक सीमित नहीं है, बल्कि धरातल पर भी उनके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इस खबर पर हमारी नज़र बनी रहेगी। देखते रहिए एमा मीडिया जनता की पुकार सच के साथ।

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