मैं हार तो जाता लेकिन तुमने मुझे हराया नहीं!
मैं हार तो जाता लेकिन तुमने मुझे हराया नहीं, यह बात महाभारत में कृष्ण से भीष्मपितामह ने कहा था तब कृष्ण ने दोनों हाथ जोड़ कर भीष्मपितामह से आशीर्वाद मागा था।
ये तो धर्म के दो महारथियों का आपस का संवाद था जिसको हमने आपके सामने रख दिया। लेकिन क्या आप ने यह महसूस किया है कि आम आदमी के जिंदगी में भी कभी ऐसा होता होगा, होता तो जरूर होगा लेकिन आदमी कभी बड़े होने के बाद ऐसा महसूस नहीं किया होगा, चालिए मैं आप को याद दिला देता हूं। कि जब आप विस्तर पर अपने छोटे से बच्चे को खेल खेल में उसे हरा देते होगे और वह जब मायूस होकर बैठ जाता होगा तब शायद आप बोलते होगे कि बेटा, मैं हार तो जाता लेकिन तुमने मुझे हराया नहीं, यह वाक्य सुनकर आपका बेटा मुस्कुराने लगता होगा, तब आप उससे कहते होगे चलो फिर से कोशिश करते हैं और दूसरी बार उससे जान बुझ कर आप हार जाते होगे, जिससे आपकी बात भी सही साबित हो जाती है और बच्चे का मनोबल भी बढ़ जाता होगा। लेकिन यह सुखद एहसास भगवान बच्चों से खेलने पर ही देते है क्योंकि एक पिता जीत कर भी अपने बच्चे को अपने बातों से यह एहसास कराता है कि तुम जीत गये हो और जब आप जान बुझ कर भी हारते होगे तो भी आप कहते होगे बेटा तुम तो फिर एक बार मुझसे जीत गये हो। आप अपने बच्चे को ऐसा शायद इसलिए कहते हैं कि मेरे बच्चे को अभी से जितने की आदत पड़ जाय और हार शब्द का डर उसके मन से निकल जाय। और उसका हौसला हमेशा ऊंचाइयों पर रहे। ये तो हो गयी बच्चो की बात, अब बड़ो की बात कर लेते हैं। अगर कोई इंसान आपसे यह कहे आप जीते हुए हो, मैं हारा हूं, और आप कहे क्या मजाक कर रहे हैं आप जीत कर अपने आप को हारे हुए बता रहे हैं और तब सामने वाला इंसान कहे कि आप थोड़ी और कोशिश करते तो जीत जाते, तो शायद उससे बड़ा शुभचिंतक आपके लिए कोई हो ही नहीं सकता लेकिन अफसोस इसकी संख्या दशमलव में है, इसलिए यह शब्द हारे वाले व्यक्ति को जीता देता है क्योंकि उसके प्रतिद्वंदी ये महसूस कर रहा है कि तुम जीत गये होते अगर और कोशिश किये हुए होते तो। इसलिए आपके मन में उमंग उत्साह भर जाता होगा कि मैं हार गया तो क्या मेरा प्रतिद्वंद्वी मुझे जीता हुआ बता रहा है।
दूसरा एक पहलू यह है किसी के प्रति आदर भाव जातने के लिए भी बाज़ी को हार जाया जाता है क्योंकि सामने वाला व्यक्ति उम्र और तजुर्बे में काफी बड़ा होता है। इसलिए "मैं हार तो जाता आपने मुझे हराया नहीं" इसी प्रसंग में फिट बैठता है क्योंकि किसी की खुशी के लिए हर कोई अपनी हार स्वीकार नहीं करता, इसके लिए इंसान के अंदर आत्म शक्ति और मनोबल की जरूरत होती है।
सप्रेम धन्यवाद
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