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असम की राजनीति में एक नया विवाद उस समय सामने आया जब मोरिगांव से भाजपा विधायक रामा कांता देउरी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।


वीडियो में देखा जा सकता है कि एक महिला मतदाता विधायक से अपने क्षेत्र में कथित रूप से विकास की कमी और लंबे समय तक उनकी अनुपस्थिति को लेकर सवाल पूछ रही है। इस बातचीत के दौरान विधायक का जवाब और उनका व्यवहार चर्चा का विषय बन गया, जिसके बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई। वीडियो में महिला मतदाता विधायक से पूछती दिखाई देती है कि क्षेत्र में अपेक्षित विकास कार्य क्यों नहीं हुए और पिछले कई वर्षों में उनकी सक्रियता क्यों कम रही। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक रामा कांता देउरी कथित तौर पर कहते हैं, “तुम्हारा नाम क्या है? मैं तुम्हारा विधायक हूं, मुझे मत सिखाओ।” यह टिप्पणी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही और मतदाताओं के प्रति उनके व्यवहार से जोड़कर देखा। इस घटना के सामने आने के बाद कई लोगों ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों और जनता के बीच संवाद की प्रकृति से जोड़ते हुए चर्चा शुरू कर दी है। आलोचकों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों को जनता के सवालों का संयम और सम्मान के साथ जवाब देना चाहिए, क्योंकि लोकतंत्र में मतदाता ही सर्वोच्च होता है। वहीं कुछ समर्थकों का कहना है कि वीडियो के पूरे संदर्भ को समझे बिना निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इस पूरे घटनाक्रम ने असम की राजनीति में राजनीतिक जवाबदेही, जनप्रतिनिधियों के व्यवहार और सार्वजनिक संवाद की मर्यादा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मुद्दे पर संबंधित राजनीतिक दल या विधायक की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया आती है या नहीं। फिलहाल यह वीडियो सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।

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