होली: मोहब्बत का त्योहार या मनोवृत्ति की परीक्षा?
होली: मोहब्बत का त्योहार या मनोवृत्ति की परीक्षा?
होली रंगों का उत्सव है, दिलों को जोड़ने का अवसर है।
लेकिन जब यही पर्व भद्दी गालियों, जबरदस्ती रंग लगाने, नशाखोरी और अराजक व्यवहार का माध्यम बन जाता है,
तो प्रश्न उठता है—क्या हम उत्सव मना रहे हैं, या अपनी असंयमित मनोवृत्ति को वैधता दे रहे हैं?
त्योहार का अर्थ उन्माद नहीं, उल्लास है।
स्वतंत्रता का अर्थ उद्दंडता नहीं, संवेदनशीलता है।
होली की असली भावना सम्मान, सहमति और सौहार्द में है—न कि किसी की गरिमा को ठेस पहुँचाने में।
यदि रंग प्रेम का प्रतीक हैं, तो उन्हें जबरदस्ती क्यों बनाया जाए?
यदि यह मेल-मिलाप का पर्व है, तो इसमें डर और असहजता क्यों घोली जाए?
आइए संकल्प लें— हम होली को फिर से मानवीय सभ्यता, मर्यादा और मोहब्बत का उत्सव बनाएँगे।
रंग लगाएँ… पर रिश्तों पर दाग नहीं।
#होली #संस्कार #मानवता #सौहार्द #जिम्मेदारउत्सव
#जनवाणी
#janvani