शाहपुर पटोरी: जहां "विकाश" की धूल में घुट रहा आम आदमी का दम ।
"क्या प्रशासन की संवेदनाएं सो गई हैं, या तंबाकू के 'धूल' ने सिस्टम की आँखों में पर्दा डाल दिया है?"
शाहपुर पटोरी नगर परिषद क्षेत्र का हृदय स्थल—जहाँ एक तरफ अनुमंडल मुख्यालय है, दूसरी तरफ प्रखंड कार्यालय (BDO/CO) और महज कुछ कदमों की दूरी पर पुलिस थाना। इसी 'पावर सेंटर' के बीचों-बीच आज मौत का व्यापार खुलेआम फल-फूल रहा है। कोठी रोड और ब्लॉक के ठीक सामने स्थित तंबाकू (चूर) के गोदामों से उड़ने वाली धूल ने आज पटोरी की आबोहवा को जहरीला बना दिया है।
सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि यह प्रदूषण उस क्षेत्र में हो रहा है जिसे पटोरी का 'शैक्षणिक और स्वास्थ्य केंद्र' कहा जाना चाहिए।
पास में ही G.B. हाई स्कूल, कन्या उच्च विद्यालय और छोटे बच्चों के स्कूल के साथ बच्चों का कोचिंग संस्थान भी हैं। जिस उम्र में बच्चों को ताजी हवा मिलनी चाहिए, वहां वे तंबाकू की तीखी धूल फांकने को मजबूर हैं।
गोदाम के पास ही अनुमंडलीय अस्पताल है। विडंबना देखिए—गरीब मरीज जहाँ अपनी सांसें ठीक कराने आता है, वहां की हवा ही उसे और बीमार कर रही है।
दूसरी तरफ प्रशासन की चुप्पी या विवशता या मिलीभगत है ये सवाल तो हम आप पर छोड़ते हैं ?
सवाल उठना लाजिमी है कि जब अनुमंडल मुख्यालय 500 मीटर के लगभग और थाना 200 मीटर के दायरे में है, तो क्या अधिकारियों को इसकी गंध नहीं आती?
* क्या प्रखंड प्रमुख, BDO, CO और नगर परिषद अध्यक्ष ने जनहित से आँखें मूंद ली हैं?
* क्या पटोरी का प्रशासन इतना 'सुस्त' हो गया है कि उसे जनता की घुटती हुई सांसों की आवाज सुनाई नहीं दे रही?
* या फिर, जैसा कि लोग दबी जुबान में कह रहे हैं, तंबाकू के कारोबार की 'शक्ति' के आगे कानून बौना साबित हो रहा है?
लोकतंत्र की इससे बड़ी विडंबना क्या होगी जहां पटोरी क्षेत्र दो विधानसभाओं और एक लोकसभा क्षेत्र के संगम पर स्थित है। यहाँ के जनप्रतिनिधि बड़े-बड़े मंचों से विकास के दावे करते हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि यहाँ का आम नागरिक अपने ही घर और सड़क पर सांस लेने के लिए संघर्ष कर रहा है।
"क्या पटोरी की जनता को अपनी बुनियादी जरूरतों और स्वच्छ हवा के लिए भी सड़क जाम और धरना-प्रदर्शन का सहारा लेना पड़ेगा? क्या बिना शोर मचाए आम जन की सुनवाई का कोई रास्ता नहीं बचा?"
प्रशासन को यह समझना होगा कि 'सफेद सोने' (तंबाकू) के इस काले कारोबार से किसी की जेब तो भर सकती है, लेकिन पूरे समाज के स्वास्थ्य की जो बलि दी जा रही है, उसकी भरपाई कभी नहीं हो पाएगी। यह लेख केवल एक शिकायत नहीं, बल्कि एक चेतावनी है—उन अधिकारियों के लिए जो कुर्सी पर बैठे हैं और उन जनप्रतिनिधियों के लिए जो वोटों की राजनीति करते हैं।
"पटोरी की जनता जवाब चाहती है: हमें स्वच्छ हवा चाहिए, तंबाकू का जहर नहीं!"
मनीष सिंह
शाहपुर पटोरी
@ManishSingh_PT