भारत की पहली LNG–डीजल ड्यूल फ्यूल ट्रेन:
भारत की पहली LNG–डीजल ड्यूल फ्यूल ट्रेन:
पूरा विवरण
भारत ने रेल परिवहन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। देश की पहली LNG–डीजल ड्यूल फ्यूल ट्रेन का शुभारंभ न केवल तकनीकी नवाचार का उदाहरण है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा सुरक्षा और आधुनिक परिवहन नीति की दिशा में एक बड़ा कदम भी है। यह पहल भारतीय रेलवे द्वारा स्वच्छ और टिकाऊ रेल संचालन के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में की गई है।
क्या है LNG–डीजल ड्यूल फ्यूल तकनीक
इस तकनीक में डीजल इंजन को इस तरह संशोधित किया गया है कि वह डीजल के साथ-साथ LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) का भी उपयोग कर सके। इंजन में LNG की हिस्सेदारी लगभग 40% तक रखी गई है, जबकि शेष डीजल का उपयोग होता है। इससे ईंधन दक्षता बढ़ती है और पारंपरिक डीजल इंजन की तुलना में प्रदूषण काफी कम होता है।
2,000 किमी से अधिक का सफल ट्रायल
इस ड्यूल फ्यूल इंजन का 2,000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक सफल परीक्षण किया गया है। ट्रायल के दौरान इंजन की शक्ति, गति, सुरक्षा मानकों और ईंधन खपत पर बारीकी से निगरानी रखी गई। परीक्षण पूरी तरह सफल रहा, जिसके बाद इसे व्यावसायिक संचालन के लिए तैयार किया गया।
पर्यावरण को होगा बड़ा लाभ
कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी
नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर जैसे हानिकारक तत्वों में गिरावट
डीजल की तुलना में LNG के दहन से कम धुआं और कम प्रदूषण
यह पहल भारत के जलवायु लक्ष्यों और हरित परिवहन नीति के अनुरूप है।
आर्थिक और रणनीतिक फायदे
LNG अपेक्षाकृत सस्ता और अधिक स्वच्छ ईंधन है। इसके उपयोग से ईंधन लागत में कमी आएगी और डीजल आयात पर निर्भरता घटेगी। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी बल मिलेगा।
भविष्य की योजना
भारतीय रेलवे की योजना है कि इस तकनीक को धीरे-धीरे अन्य मालगाड़ियों और डीजल इंजनों में भी लागू किया जाए। यदि यह मॉडल बड़े पैमाने पर अपनाया गया, तो आने वाले वर्षों में रेलवे के कार्बन फुटप्रिंट में भारी कमी आ सकती है।