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पटवारी के करतूतों पर संरक्षण या कोटवानी के रसूख के आगे बौना प्रशासन.?

जिम्मेदार को बचाने लगा सिस्टम..!

उमरिया। जिले के मानपुर तहसील अंतर्गत पटवारी हल्का मझगवां (82) अंतर्गत ग्राम झमइया में खरीफ सीजन के दौरान धान की बुवाई न होने के बावजूद गिरदावरी में फसल दर्ज कर उपार्जन के लाभ के मामले में शिकायत के बाद भी मामला ठंडे बस्ते में है। तहसीलदार से लेकर एसडीएम और सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायत के बाद भी प्रशासन कार्यवाही के बजाय हीलाहवाली कर रहा है। पत्थरीली भूमि पर सर्वेयर राय द्वारा किए गए फर्जी गिरदावरी का सत्यापन जिस पटवारी योगिता ठाकुर के द्वारा आंख मूंदकर कर दिया गया, उससे पूरे राजस्व अमले की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। बता दें कि खेमचंद कोटवानी द्वारा आराजी खसरा नंबर 67/1 रकबा 4.022 हेक्टेयर तथा अजय कोटवानी द्वारा आराजी खसरा नंबर 67/2 रकबा 0.753 हेक्टेयर, स्थित ग्राम झमइया, तहसील मानपुर में खरीफ फसल धान की बुवाई नहीं की गई थी। इसके बावजूद गिरदावरी अभिलेख में धान फसल दर्ज कराई गई। उक्त प्रविष्टि के आधार पर खरीफ उपार्जन हेतु पंजीयन कराया गया और बाद में धान का विक्रय उपार्जन केंद्र सेवा सहकारी समिति मर्यादित ददरौड़ी में किया गया।
जिस भूमि पर लगभग दो सौ क्विंटल धान का उत्पादन दर्शाया गया है, वह भूमि वास्तविकता में पत्थरिली है, और खेती योग्य स्थिति नहीं है। यही नहीं सूत्रों की माने तो खेमचंद और अजय कोटवानी द्वारा रबी वर्ष 22 में गेहूं, खरीफ 23 में धान रबी 23 में चना, रबी 24 में गेहूं और खरीफ 24 में धान गिरदावरी में दर्ज कराया जा चुका है। जबकि सूत्रों का कहना है कि यदि वर्तमान के उक्त खसरा नंबर को देखा जाए तो एक भी बार जुताई नहीं की गई और जमीन पत्थर युक्त है। फसल उगाया जाना संभव नहीं है, इसके बावजूद गिरदावरी में फसल दर्शाकर उपार्जन केंद्र में धान का विक्रय किया गया।
बिचौलियों के द्वारा किए गए फर्जी करतूतों की शिकायत तहसीलदार और एसडीएम को दी गई थी, तो आनन-फानन में कुछ हिस्से को जुताई कराकर खेती करने का प्रयास किया गया, लेकिन भूमि खुद ही गवाही  दे रही है कि खेत में हल पहली बार चलाया गया है। लेकिन प्रशासनिक अधिकारी शून्य हैं, और शिकायत ठंडे बस्ते में है।

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