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धनसीर रोड रेल कॉरिडोर में लगी भीषण आग—हजारों पेड़ खाक, करोड़ों की संपत्ति का नुकसान

बिलाईगढ़ वन परिक्षेत्र अंतर्गत धनसीर रोड के रेल कॉरिडोर कक्ष क्रमांक 408 में गुरुवार को अचानक भीषण आग भड़क गई। आसपास से गुजर रहे लोगों ने आग की लपटें देख वन विभाग को सूचना दी, लेकिन तब तक आग विकराल रूप ले चुकी थी। इस आगजनी में हजारों की संख्या में सागौन एवं अन्य इमारती पेड़ जलकर राख हो गए। आग केवल प्लांटेशन तक सीमित नहीं रही बल्कि आसपास 4 से 5 किलोमीटर क्षेत्र में फैले वन क्षेत्र को भी अपनी चपेट में ले लिया।
वन विभाग की टीम द्वारा आग बुझाने का प्रयास किया गया, परंतु आग इतनी तेज थी कि पूरा प्लांटेशन राख में तब्दील हो गया। यह आगजनी वन विभाग को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुँचाने वाली साबित हुई है।
रेंजर की निष्क्रियता से बढ़ रही आगजनी की घटनाएं
स्थानीय लोगों और वन प्रेमियों का कहना है कि रेंजर का फील्ड में राउंड कम होता है और वे अधिकतर कार्यालय में ही रहते हैं। कुछ दिन पहले वन विभाग कार्यालय से मात्र 100 मीटर की दूरी पर आग लगी थी, जिसमें सैकड़ों सागौन के पेड़ जल गए, पर अधिकारी उसे भी देख नहीं पाए। लगातार आग लगने की घटनाओं से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
लाखों रुपये की सुरक्षा राशि—काम अधूरा
बताया जाता है कि इस प्लांटेशन का निर्माण केम्पा मद से करोड़ों रुपए खर्च कर किया गया था। करीब 42,000 मिश्रित पौधे लगाए गए थे, जिनमें से अधिकांश जल चुके हैं।
हर साल लाइन कटिंग, सफाई और सुरक्षा के लिए लाखों रुपए जारी होते हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि कार्य के नाम पर केवल फाइलों में खर्च दिखाया जाता है, जमीन पर कार्य नहीं होते, जिसके चलते आग तेजी से फैल जाती है।
पीसीसीएफ ने की थी प्लांटेशन की तारीफ
करीब तीन वर्ष पहले उस समय के केम्पा प्रमुख और वर्तमान प्रधान मुख्य वन संरक्षण एवं वन बल प्रमुख श्रीनिवास राव ने बिलाईगढ़ दौरे के दौरान इस प्लांटेशन का निरीक्षण किया था और सराहना करते हुए सुरक्षा कर्मियों को 500–500 रुपये का प्रोत्साहन पुरस्कार दिया था।
आज वही प्लांटेशन पूरी तरह से खाक हो चुका है।
लापरवाही पर होगी कार्रवाई : एसडीओ अमित गुप्ता
वन विभाग के एसडीओ अमित गुप्ता ने बताया कि आगजनी की सूचना मिलते ही सारंगढ़ से टीम रवाना की गई। प्रारंभिक जांच में बीट गार्ड की लापरवाही सामने आई है।
उन्होंने कहा कि—
“सारंगढ़ की टीम विस्तृत जांच कर रही है। यदि रेंजर की संलिप्तता या लापरवाही पाई जाती है तो उन पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उड़ानदस्ते की टीम भी मौके पर पहुंच गई है।”
निष्कर्ष
धनसीर रोड रेल कॉरिडोर की यह आगजनी न केवल वन विभाग के लिए बड़ी क्षति है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी गहरी चोट है। करोड़ों की लागत से विकसित प्लांटेशन की ऐसी दुर्दशा विभागीय लापरवाही पर बड़े सवाल खड़े करती है।

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