वोट की सियासत में खाली हुआ खजाना? आम जनता पर बढ़ेगा बोझ!
वोट की सियासत में खाली हुआ खजाना? आम जनता पर बढ़ेगा बोझ!
चुनावी साल में सरकार पर लोकलुभावन योजनाओं और मुफ्त घोषणाओं के जरिए खजाने पर दबाव बढ़ाने के आरोप लग रहे हैं। विपक्ष का दावा है कि वोट के चक्कर में वित्तीय अनुशासन कमजोर हुआ है। यदि राजकोषीय घाटा बढ़ता है तो आम जनता पर टैक्स और महंगाई का असर पड़ सकता है। नौकरी पेशा वर्ग की बचत प्रभावित हो सकती है, जबकि मजदूरों के लिए रोजगार योजनाओं में कटौती की आशंका रहती है। हालांकि सरकार का कहना है कि विकास कार्य और कल्याणकारी योजनाएं जारी रहेंगी और वित्तीय स्थिति संतुलित है।