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ढालीपुर में यमुना किनारे खनन का खुला खेल! नदी से महज 100 मीटर पर RBM स्टॉक — 500 मीटर का नियम किसने फाड़ा? खनन विभाग की नींद कब खुलेगी?

देहरादून/विकासनगर (ढालीपुर): उत्तराखंड की पवित्र यमुना नदी एक बार फिर लूट और लापरवाही का शिकार हो रही है। विकासनगर तहसील के ढालीपुर क्षेत्र में आवंटित एक खनन पट्टा अब घोटाले का नया केंद्र बन गया है।

सूत्रों का खुलासा है कि पट्टाधारक ने न सिर्फ नदी के बिल्कुल करीब पट्टा हासिल कर लिया, बल्कि रिवर बेड मटेरियल (RBM) का भारी-भरकम स्टॉक भी नदी तट से महज 100 मीटर की दूरी पर पास करवा लिया है। जबकि पर्यावरण मंत्रालय और उत्तराखंड खनन नियमों के मुताबिक नदी किनारे से कम से कम 500 मीटर की दूरी अनिवार्य है।

और सबसे चौंकाने वाली बात — यह ढालीपुर वही गांव है जहां उत्तराखंड का एकमात्र रामसर साइट आसन कंजर्वेशन रिजर्व (आसन वेटलैंड / ढालीपुर झील) स्थित है। 21 जुलाई 2020 को अंतरराष्ट्रीय महत्व का वेटलैंड घोषित यह 444.4 हेक्टेयर का क्षेत्र यमुना और आसन नदी के संगम पर है। यहां 330 से ज्यादा पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें क्रिटिकली एंडेंजर्ड सफेद पीठ वाला गिद्ध, लाल सिर वाला गिद्ध और बेयर की पॉचर्ड जैसी दुर्लभ प्रजातियां शामिल हैं। यह साइट सेंट्रल एशियन फ्लाईवे पर प्रवासी पक्षियों का अहम पड़ाव है और endangered गोल्डन महाशीर मछली का भी प्रजनन स्थल है।

नदी से महज 100 मीटर पर RBM का यह स्टॉक बाढ़, कटाव और सिल्टेशन बढ़ाकर इस अंतरराष्ट्रीय संरक्षित वेटलैंड को सीधा खतरा पहुंचा रहा है।

यह नहीं कि नियम पता नहीं था — यह तो जानबूझकर तोड़ा गया है। सूत्र बता रहे हैं कि प्रभावशाली लोगों के दबाव में विभाग ने बिना साइट इंस्पेक्शन के, बिना पर्यावरणीय मंजूरी के फाइलें पास कर दीं। नतीजा? यमुना किनारे ढेरों RBM स्टॉक खड़ा है, जो बाढ़ के समय नदी को और उफान पर ला सकता है, कटाव बढ़ा सकता है और आसपास की सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि को बर्बाद कर सकता है।

भूजल स्तर पहले ही गिर रहा है, अब यह स्टॉक उसे और तेजी से खराब करेगा — और रामसर साइट की जैव विविधता को हमेशा के लिए नुकसान पहुंचा सकता है।

सबसे बड़ा सवाल ये है — अनुमति किसने दी?

कौन सा अधिकारी या अफसर नदी से 400 मीटर कम दूरी पर स्टॉक की मंजूरी दे बैठा?

क्या पट्टाधारक और विभाग के बीच सांठगांठ है?

क्या फाइलें सिर्फ साइन करने के लिए आई थीं, जांच के लिए नहीं?
स्थानीय ग्रामीण अब चुप नहीं बैठने वाले। उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से अपील की है — “माननीय CM साहब, ढालीपुर का यह RBM स्टॉक घोटाला तुरंत बंद करवाएं। उच्चस्तरीय SIT जांच कराई जाए। दोषी अधिकारियों और पट्टाधारक के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। नदी बचाओ, उत्तराखंड बचाओ!”

यह मामला सिर्फ एक पट्टे का नहीं है। पूरे पछवादून क्षेत्र में यमुना को लूटने का सिलसिला चल रहा है।

एक तरफ सरकार “नदी बचाओ अभियान” की बात करती है, दूसरी तरफ विभाग की आंखें बंद हैं। क्या खनन विभाग सोया हुआ है? या फिर माफिया के इशारे पर काम कर रहा है?

अब समय आ गया है जवाबदेही तय करने का।

नदी से 500 मीटर का नियम किसने कुचला?

अनुमति देने वाले अधिकारियों के नाम सार्वजनिक किए जाएं!
अगर आज कार्रवाई नहीं हुई, तो कल यह स्टॉक बाढ़ का कारण बनेगा और जनता पूछेगी — “सरकार कहां थी?”

जनता की मांग साफ और बेबाक है —
तत्काल RBM स्टॉक जब्त किया जाए

संबंधित खनन पट्टा तुरंत रद्द किया जाए

दोषी पट्टाधारक, ठेकेदार और मिलीभगत करने वाले अधिकारियों पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाए और जेल भेजा जाए
यमुना नदी किनारे सभी खनन पट्टों और स्टॉक की नई-नई उच्चस्तरीय जांच कराई जाए — खासकर रामसर साइट आसन वेटलैंड के आसपास

खनन विभाग और जिला प्रशासन — अब चुप्पी तोड़ो!
वरना यह “100 मीटर का खेल” पूरे उत्तराखंड में नया घोटाला बन जाएगा।

यमुना मां को बचाओ, रामसर साइट को बचाओ — अब और देर नहीं!

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