एक अनोखी कलात्मक खोज का नाम ‘दर्पण भाषा’
साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में एक अभिनव योगदान के रूप में ‘दर्पण भाषा’ इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। भाषा और साहित्य की दुनिया में नई दिशा देने वाली इस विशेष शैली के आविष्कारक एवं शोधकर्ता डॉ. उत्तम दास हैं। वर्षों के परिश्रम, शोध और रचनात्मक चिंतन के माध्यम से उन्होंने एक नई भाषाई धारा स्थापित करने में सफलता प्राप्त की है। राज्य के विभिन्न वर्गों में इस भाषा को लेकर उत्सुकता और चर्चा लगातार बढ़ रही है।
क्या है दर्पण भाषा?
डॉ. दास के अनुसार, दर्पण भाषा एक विशेष प्रकार की लेखन शैली है, जिसमें शब्द या वाक्य दर्पण में प्रतिबिंबित रूप में भी पढ़े जा सकते हैं। अर्थात बाएँ से दाएँ या दाएँ से बाएँ पढ़ने पर भी उसका अर्थ समान रहता है। इस अनोखी अवधारणा के आधार पर उन्होंने कई पुस्तकों की रचना की है। उनका मानना है कि यह भाषा पाठकों को सोच की नई दिशा प्रदान करती है और साहित्य में सृजनात्मकता के नए द्वार खोलती है।
साहित्यिक योगदान
कॉलेज जीवन से ही साहित्य साधना में सक्रिय डॉ. उत्तम दास ने वर्ष 2008 में अंग्रेजी में “Meditation and Its Implication” नामक पुस्तक प्रकाशित की। इसके बाद उन्होंने असमिया में “नामघोषा” तथा बंगाली में “এস, মানুষ হও” (आओ, मनुष्य बनो) जैसी कृतियों की रचना कर साहित्य जगत में अपनी अलग पहचान बनाई।
उनकी रचनात्मक यात्रा का एक महत्वपूर्ण अध्याय “The Holy Bible” का दर्पण भाषा में अनुवाद है। इस पुस्तक का औपचारिक लोकार्पण 2 मार्च 2020 को नई दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में किया गया, जहाँ विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्ट लोग उपस्थित रहे।
सम्मान और पहचान
डॉ. दास को उनके शोध और साहित्यिक योगदान के लिए कई सम्मान प्राप्त हुए हैं। उन्हें इंटरनेशनल बुद्ध शांति पुरस्कार–2025 सहित अन्य प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया है। असमिया भाषा को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने के प्रयासों के लिए उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया।
भविष्य की दिशा
दर्पण भाषा के माध्यम से भाषा और साहित्य में एक रचनात्मक क्रांति लाने का उनका लक्ष्य है। नई पीढ़ी को सृजनात्मक चिंतन और शोध के प्रति प्रेरित करना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है। कई शैक्षणिक संस्थानों में इस भाषा को लेकर चर्चा और अध्ययन प्रारंभ हो चुका है।
डॉ. दास के शब्दों में, “दर्पण भाषा साहित्य को एक नई दिशा देगी और लोगों को सोचने का नया दृष्टिकोण प्रदान करेगी।”
समग्र रूप से देखा जाए तो ‘दर्पण भाषा’ असमिया साहित्य में एक विशिष्ट और अनोखा योगदान है। आने वाले समय में यह भाषा किस प्रकार नई ऊँचाइयों को छूती है, यह देखना दिलचस्प होगा।