'मातृभाषा रत्न' मानद उपाधि
कृष्ण कुमार पाठक द्वारा लोकतांत्रिक व्यवस्था में समानता और संवैधानिक विचार..!
लोकतांत्रिक व्यवस्था में समानता और संतुलन के साथ साथ समाजिक गतिविधियों में सुचिता, पारदर्शित निगरानी में प्रशासनिक पारदर्शित के साथ साथ जनहित में विधायिका द्वारा विधिसम्मत जनमानस में आत्मसात और राष्ट्रीय एकीकरण संस्कृति संरक्षण संवर्धन विकास के साथ साथ नैतिक कर्तव्य ही जनप्रतिनिधियों का मूल उत्तरदायित्व है कहना अन्यथा ना होगा।
कभी में समानता की परिकल्पना को साकार करने में प्रतिभा के माप की अंकों में असमानता पूर्ण चयन नहीं किया जाना चाहिए बल्कि उचित अवसर में समानता लाने हेतु संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना होगा।
आरक्षण से समानता लाने के लिए संविधान अधिकार संरक्षण के साथ साथ जनमानस के बीच आर्थिक आधार पर श्रेणीकृत करते हुए शिक्षा,स्वस्थ, रोजगार सृजन एवं अवसर की समानता के लिए विधायिका द्वारा विधिसम्मत जनहित में निर्णय लिया जाना लोकतांत्रिक व्यवस्था में का मूल आधार है।
उपरोक्त आधार पर विचार अभिव्यक्ति भाव कविता रुप में रचना प्रेषित।