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जनगणना अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य, इसे पूर्ण निष्ठा के साथ करें - कलेक्टर

जनगणना अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य, इसे पूर्ण निष्ठा के साथ करें — कलेक्टर

दो दिवसीय नगरीय निकायों का प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न

भारत की जनगणना 2027 के लिए प्रदेश स्तर से नियुक्त मास्टर ट्रेनर्स द्वारा प्रशिक्षण कार्य संचालित किया जा रहा है। इसके तहत ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों के लिए अलग-अलग दो-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम निर्धारित किए गए थे। भोपाल से आए संभाग स्तरीय मास्टर ट्रेनर डॉ. रघुवंश मणी द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया गया। नगरीय निकायों का दो दिवसीय प्रशिक्षण शुक्रवार को सम्पन्न हुआ।
इस दौरान कलेक्टर एवं प्रमुख जिला जनगणना अधिकारी श्री लोकेश कुमार जांगिड़ ने कहा कि जनगणना अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है, अतः इसे पूर्ण निष्ठा एवं जिम्मेदारी के साथ किया जाए। इस अवसर पर जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनर श्री विपिन कुमार सिंह, आयुक्त नगर निगम श्री सतेन्द्र धाकरे सहित अन्य नगरीय निकायों के मुख्य नगर पालिका अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रमुख जिला जनगणना अधिकारी श्री जांगिड़ ने निर्देश दिए कि निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार समय-सीमा में सभी कार्य पूर्ण किए जाएँ। जनगणना-2027 देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी, जो दो चरणों में आयोजित की जाएगी। प्रथम चरण में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना की जाएगी। यह चरण 1 मई 2026 से 30 मई 2026 तक घर-घर जाकर सम्पन्न किया जाएगा। सभी अधिकारी अपने-अपने चार्ज क्षेत्रों में विशेष ध्यान दें तथा किसी भी संशय की स्थिति में तत्काल मास्टर ट्रेनर्स से मार्गदर्शन प्राप्त करें।
प्रशिक्षण के दौरान संभाग स्तरीय मास्टर ट्रेनर डॉ. रघुवंश मणी ने बताया कि नगरीय क्षेत्रों में जनगणना संचालन की मूल इकाई वार्ड होता है। प्रत्येक वार्ड की अनुमानित जनसंख्या का आंकलन किया जाए। जिस वार्ड की जनसंख्या एक एचएलबी के बराबर या उससे कम हो, वहाँ कम से कम एक एचएलबी बनाया जाना आवश्यक है। किसी भी स्थिति में एक एचएलबी बनाने हेतु एक से अधिक वार्डों के क्षेत्रों को जोड़ा नहीं जा सकता। यदि किसी वार्ड की जनसंख्या एक एचएलबी से अधिक हो, तो उसे दो या अधिक एचएलबी में विभाजित किया जाएगा। सीमांकन के लिए स्पष्ट एवं स्थायी भौतिक विशेषताओं (प्राकृतिक अथवा मानव निर्मित) का उपयोग किया जाए।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि प्रत्येक वार्ड में स्लम क्षेत्रों की पहचान एवं सीमांकन किया जाए तथा एचएलबी केवल स्लम क्षेत्रों के भीतर ही बनाए जाएँ। किसी भी परिस्थिति में स्लम एवं गैर-स्लम क्षेत्रों को मिलाकर एचएलबी नहीं बनाया जाएगा।
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