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मध्य प्रदेश के 1895 स्कूलों में टीचर्स ही नही,435 स्कूलों में शिक्षक पर बच्च्चे नही,कैग रिपोर्ट में चौकाने वाला खुलासा

भोपाल : कैग (CAG) की रिपोर्ट ने मध्यप्रदेश की स्कूल शिक्षा व्यवस्था को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानि कैग की ताजा रिपोर्ट मध्य प्रदेश विधानसभा में पेश करते हुए बताया गया है कि 1895 स्कूल ऐसे हैं, जहां छात्र तो हैं. लेकिन एक भी शिक्षक यहां पदस्थ नहीं है. वहीं, दूसरी ओर 435 स्कूल ऐसे पाए गए जहां एक भी विद्यार्थी का नामांकन नहीं है, इसके बावजूद यहां शिक्षकों की नियुक्ति की गई है.
पद नहीं थे स्वीकृत, शिक्षकों को किया गया पदस्थ
कैग रिपोर्ट के अनुसार अगस्त 2023 तक प्रदेश के 66 हजार 814 स्कूलों की समीक्षा में यह विसंगतियां सामने आईं हैं. 435 शून्य नामांकन वाले स्कूलों में से 105 स्कूलों में एक वर्ष से, 38 स्कूलों में दो वर्षों से, 33 स्कूलों में तीन वर्षों से और 259 स्कूलों में चार वर्षों से किसी छात्र का नामांकन नहीं हुआ है. चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 320 स्कूलों में शिक्षकों के लिए पद स्वीकृत ही नहीं थे, फिर भी वहां शिक्षक पदस्थ पाए गए. कैग ने विभाग के जवाब को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि बंद करने या तबादले की प्रक्रिया के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया.
शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत प्राइमरी स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात 30:1, मिडिल में 35:1 व सेकंडरी और हायर सेकंडरी में 30:1 होना चाहिए. हालांकि, प्राइमरी स्तर पर औसत स्थिति सामान्य बताई गई है, लेकिन मिडिल स्कूलों में यह अनुपात 37:1, सेकंडरी में 40:1 और हायर सेकंडरी में 54:1 दर्ज है. जिलों की स्थिति और भी चिंताजनक है. टीकमगढ़ में मिडिल स्कूलों का पीटीआर 57:1 है, जो राज्य औसत से काफी अधिक है. सेकंडरी स्तर पर अशोक नगर में 66:1 का अनुपात दर्ज हुआ. वहीं, हायर सेकंडरी में टीकमगढ़ का पीटीआर 112:1 पाया गया, जो राज्य औसत से 58 अंक अधिक है.

कम नामांकन होने से पड़ेगा ज्यादा वित्तीय भार
लेखा परीक्षण में पाया गया कि 6 हजार 878 प्राइमरी स्कूलों में 20 से कम छात्र नामांकित थे, जहां 11 हजार 882 शिक्षक पदस्थ थे. इनमें 374 शून्य नामांकन वाले स्कूल भी शामिल हैं, जहां 174 शिक्षक तैनात थे. इसी प्रकार 76 मिडिल स्कूलों में दस से कम छात्र थे, लेकिन वहां 113 शिक्षक पदस्थ थे. कैग के अनुसार 6 हजार 954 कम नामांकन वाले स्कूलों में युक्तियुक्तकरण न किए जाने से शासन पर 11 हजार 995 शिक्षकों का वित्तीय भार पड़ा. इन शिक्षकों का उपयोग अधिक नामांकन वाले स्कूलों में किया जा सकता था.
साल 2023 की कैग रिपोर्ट के अनुसार आंकड़े

6 हजार 607 स्कूलों में स्वीकृत संख्या से 11 हजार 733 शिक्षक अधिक पदस्थ पाए गए.

जबकि 29 हजार 116 स्कूलों में 99 हजार 682 शिक्षकों की कमी दर्ज की गई.

ग्रामीण क्षेत्रों के 62 हजार 213 स्कूलों में स्वीकृत 2 लाख 81 हजार 887 पदों के मुकाबले 1 लाख 98 हजार 175 शिक्षक ही पदस्थ हैं.

4 हजार 601 शहरी स्कूलों में 47 हजार 556 स्वीकृत पदों के मुकाबले 43 हजार 319 शिक्षक पदस्थ हैं.

शहरी क्षेत्रों में 91 फीसदी से अधिक पद भरे गए हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 70 प्रतिशत है.

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