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6 साल की नन्ही माहेरा फातेमा बांठिया ने रखा पहला रोजा, परिवार ने बढ़ाया हौसला

*6 साल की नन्ही माहेरा फातेमा ने रखा पहला रोजा, परिवार ने बढ़ाया हौसला*

रिपोर्ट -रियाज फारुक खोकर

बुरहानपुर। माहे रमजान के पवित्र महीने में जहां बड़े-बुजुर्ग इबादत में मशगूल हैं, वही खंडवा की माहेरा फातेमा बांठिया ने रोजा रखकर सबका दिल जीत लिया। छोटी सी उम्र में माहेरा ने पहला रोजा मुकम्मल कर अल्लाह की इबादत में अपनी आस्था और लगन का परिचय दिया।

माहेरा फातेमा शाहबुद्दीन बांठिया खंडवा की बेटी हैं। रमजान शुरू होते ही उन्होंने परिवार से रोजा रखने की इच्छा जताई। माहेरा के दादा इमाम बांठिया ने बताया कि जब माहेरा ने कहा कि वह भी अल्लाह को खुश करने के लिए रोजा रखना चाहती है, तो परिवार ने उसका हौसला बढ़ाया। सुबह उसे सहरी करवाई गई और दिनभर उसका उत्साह बनाए रखा गया।

पूरा रोजा मुकम्मल करने पर परिवार ने फूलों की माला पहनाकर माहेरा की हौसला अफजाई की। घर में खुशी का माहौल रहा और सभी ने उसकी सराहना की।

माहेरा ने बताया कि उसने बड़ों से सुना है कि अल्लाह रोजेदार की दुआ कुबूल करते हैं। इसी प्रेरणा से उसने पहला रोजा रखा। उसे परिवार के साथ सहरी और इफ्तार करना अच्छा लगता है। वह पांचों वक्त की नमाज के बाद अपने नगर, देश की तरक्की, खुशहाली और अमन के लिए दुआ मांग रही है।

रमजान के इस पाक महीने में माहेरा की यह पहल न सिर्फ बच्चों के लिए प्रेरणादायक है, बल्कि समाज को भी यह संदेश देती है कि इबादत और अनुशासन की सीख उम्र की मोहताज नहीं होती।

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