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बड़हरा में 349 एकड़ सरकारी जमीन की अवैध जमाबंदी पर कार्रवाई अटकी, करोड़ों का घोटाला आ सकता है सामने

भोजपुर के बड़हरा प्रखंड में गंगा नदी से जुड़ी 349 एकड़ सरकारी जमीन की अवैध जमाबंदी का मामला फाइलों में अटका है। 228 लोगों के नाम पर हुई इस धोखाधड़ी को रद करने की सिफारिश एक साल से अधिक समय से एडीएम और सीओ कार्यालय के बीच लंबित है।
भोजपुर जिले के बड़हरा प्रखंड अंतर्गत सिन्हा मौजा में गंगा नदी से जुड़ी 349 एकड़ सरकारी जमीन की अवैध जमाबंदी का मामला अब फाइलों में दबकर रह गया है, जिस कारण जिले का सबसे बड़े जमीन घोटाला से पर्दा नहीं उठ पा रहा है।
गंगा नदी के किनारे स्थित इस बहुमूल्य जमीन की बंदरबांट कर 228 लोगों के नाम पर अवैध तरीके से जमाबंदी पूर्व में कर दी गई थी।

स्थानीय स्तर पर जांच के बाद जमाबंदी रद करने की अनुशंसा भी की गई, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण एक वर्ष से अधिक समय से मामला एडीएम और सीओ कार्यालय के बीच अटका हुआ है।

सूत्रों के अनुसार यह जमीन गंगा नदी, काली स्थान, देवस्थानों तथा अन्य सरकारी किस्म की भूमि के रूप में दर्ज थी। आरोप है कि वर्षों पहले राजस्व अभिलेखों में हेरफेर कर इसे निजी नामों पर दर्ज करा दिया गया।

स्थानीय सीओ ने विस्तृत जांच के बाद इन जमाबंदियों को अवैध करार देते हुए रद करने की अनुशंसा एडीएम से की थी। इसके बाद फाइल एडीएम कार्यालय पहुंची, लेकिन वहां से आगे की कार्रवाई लंबे समय तक नहीं हो सकी। हाल में नाम मात्र की हुई तो वो भी अब तक नाकाफी है।
जानकारी के मुताबिक तत्कालीन राज्य के राजस्व सचिव केके पाठक ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए थे और अतिक्रमण से जमीन मुक्त कराने को कहा था।

बावजूद इसके प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई गई। सवाल यह उठ रहा है कि जब जांच में अवैध जमाबंदी की पुष्टि हो चुकी है, तो रदीकरण की प्रक्रिया में इतनी देरी क्यों हो रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि गंगा किनारे की यह जमीन सार्वजनिक उपयोग की थी, जिस पर निजी नाम दर्ज होने के बाद से सरकारी संपत्ति पर स्थायी कब्जे हो गया।
तत्कालीन दो सीओ को कुछ मालूम नहीं, आईएएस ने खुलवाई फाइल
राजस्व विभाग के लापरवाही की हद देखिए कि इस मामले का खुलासा तत्कालीन सीओ रिंकू यादव ने फरवरी मार्च में पिछले वर्ष किया था। तब से लेकर अब तक दो सीओ प्रभार में रहे परंतु उन्हें इस संबंध में कुछ पता तक नहीं था।

एक तरफ एडीएम कार्यालय कहता है नोटिस का आदेश अंचल को दिया गया है। दूसरी तरफ अंचलाधिकारी कहता है इस तरह की कोई जानकारी नहीं है। इस मामले को लगातार दबाया जा रहा था, परंतु नवोदित प्रशिक्षु आईएएस सह वर्तमान में प्रभारी अंचलाधिकारी ने जानकारी मिलने के साथ इस फाइल को खुलवाया है।
उन्होंने बताया कि राजस्व कर्मचारियों के हड़ताल से वापस आने के साथ ही इस पर आगे की कार्रवाई शुरू हो जाएगी। सीओ की इस नई कार्रवाई के बाद एक बार फिर उम्मीद जगी है कि इस मामले में कार्रवाई होगी।

राजस्व विभाग के जानकार बताते हैं कि 349 एकड़ जमीन का मामला छोटा नहीं है और इसकी बाजार कीमत करोड़ों में आंकी जा रही है। ऐसे में प्रशासनिक सुस्ती पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।

इस तरह के मामले अन्य अंचलों भी होने की संभावनाएं
बड़हरा की तरह सरकारी जमीन की अवैध जमाबंदी का मामला गंगा और सोन नदी से जुड़े जिले के शाहपुर, बिहिया, कोईलवर, संदेश, अगिआंव और तरारी में भी हो सकते हैं। सही ढंग से जांच हुई तो हजारों एकड़ सरकारी जमीन की अवैध जमाबंदी के बड़े घोटाले का खुलासा हो सकता है।

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