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लगेगा साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण, जानें भारत में समय और सूतक के नियम

साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च, मंगलवार को लगने जा रहा है। यह एक ‘खग्रास’ यानी पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जिसमें पृथ्वी चंद्रमा को पूरी तरह से ढंक लेगी। ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण को एक संवेदनशील घटना माना जाता है, जिसका प्रभाव मानव जीवन पर गहरा पड़ता है। विशेष बात यह है कि यह ग्रहण भारत के हर शहर में देखा जा सकेगा, इसलिए इसका धार्मिक महत्व और सूतक काल भी पूरी तरह से मान्य होगा। भारत के अलावा यह रूस, चीन, जापान, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे देशों में भी दिखाई देगा।
ग्रहण का समय और सूतक काल
भारतीय समयानुसार, इस पूर्ण चंद्र ग्रहण का आरंभ 3 मार्च को दोपहर 3:20 बजे होगा। ग्रहण का मध्य शाम 5:04 बजे रहेगा और इसकी समाप्ति शाम 6:47 बजे होगी। कुल मिलाकर ग्रहण की अवधि 3 घंटे 27 मिनट की रहेगी। चूंकि यह भारत में दृश्यमान है, इसलिए सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले यानी सुबह 6:20 बजे से ही प्रभावी हो जाएगा। सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं और किसी भी प्रकार की पूजा-अर्चना या शुभ कार्य वर्जित होते हैं।

गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सावधानियां
ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। ऐसी मान्यता है कि ग्रहण की छाया का सीधा असर गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ सकता है। इसलिए:
सूतक काल में क्या करें और क्या न करें?
सूतक काल और ग्रहण के समय भोजन करना, सोना, तेल मालिश करना और बाल काटना वर्जित माना गया है। हालांकि, बच्चे, बुजुर्ग और बीमार व्यक्ति इन नियमों में छूट ले सकते हैं। खाने-पीने की चीजों को दूषित होने से बचाने के लिए उनमें पहले से ही ‘तुलसी के पत्ते’ या ‘कुश’ डाल देना चाहिए। ग्रहण काल में मंत्रों का जाप करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य अवश्य करें, जिससे ग्रहण के नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सके।

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