
गुटखा पान मसाला विक्रेता,धन कुबेर बनने की चाहत में प्रशासन को दे रहे चुनौती
ओवर रेटिंग से खुलेआम बिक रहा गुटखा पान मसाला
जनपद बहराइच के विकासखंड जरवल कस्बा के अंतर्गत संचालित पान मसाला गुटखा विक्रेता ओवर रेटिंग से कर रहे हैं वसूली जिम्मेदार मौन,गुटखा–पान मसाला की बिक्री में अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। शहर से लेकर कस्बों और ग्रामीण बाजारों तक निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूले जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं,जब ग्राहक अधिक कीमत पर सवाल उठाते हैं तो दुकानदार “माल की कमी” का हवाला देकर पल्ला झाड़ लेते हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि कमी माल की है या निगरानी की,सूत्रों का दावा है कि थोक स्तर पर सप्लाई सीमित कर कृत्रिम कमी का माहौल बनाया जा रहा है,जिसका असर ग्रामीण क्षेत्रों में दिखाई पड़ने लगा है,यह कृत सीधे-सीधे उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन और कालाबाजारी की श्रेणी में आता है,Legal Metrology Act के तहत पैक्ड वस्तुओं की बिक्री एमआरपी से अधिक मूल्य पर करना दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद खुलेआम अतिरिक्त वसूली जारी है,हैरानी की बात यह है कि संबंधित विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई या सार्वजनिक चेतावनी सामने नहीं आई है,नाम न छापने की शर्त पर दुकानदार विक्रेता ने बताया कि कमला पसंद पर एमआरपी 156 है, लेकिन 185 की दी जा रही थी,लेकिन कुछ दिनों से 190,फिर 200,फिर 215 अब 240 की बताई जा रही है इसलिए मैंने उसको लाना ही बंद कर दिया,जबकि उपभोक्ताओं का कहना है कि मुझे खाने की आदत है मुझे जरूरत है,जब इसकी शिकायत करता हूं तो कहते हैं मत खरीदो या कहीं अलग से ले लो,
*कानून क्या कहता है?*
*एमआरपी ही अंतिम कीमत है* उत्पाद के पैकेट पर छपी हुई एमआरपी में सभी कर (GST आदि) शामिल होते हैं। कोई भी दुकानदार एमआरपी से एक रुपया भी ज्यादा नहीं ले सकता,
*दोषपूर्ण बिक्री (Rule 39)* पैकेट बंद सामान को एमआरपी से अधिक पर बेचना, कानूनी मापविज्ञान (पैकेज्ड कमोडिटीज) नियमों का उल्लंघन है।