
आसन वेटलैंड और यमुना नदी को अवैध स्टोन क्रशरों से गंभीर खतरा: मां यमुना रक्षक संघ ने
जिलाधिकारी को सौंपी शिकायत, तत्काल बंदी और कार्रवाई की मांग
देहरादून, 20 फरवरी 2026। उत्तराखंड की पहली रामसर साइट आसन वेटलैंड (आसन कंजर्वेशन रिजर्व) और यमुना नदी के संरक्षण के लिए काम कर रहे मां यमुना रक्षक संघ ने जनपद देहरादून की तहसील विकासनगर अंतर्गत ग्राम ढकरानी में यमुना नदी के किनारे संचालित लगभग 20 अवैध स्टोन क्रशरों के खिलाफ जिलाधिकारी देहरादून को विस्तृत शिकायती पत्र सौंपा है। संगठन ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेशों की खुली अवहेलना का गंभीर आरोप लगाते हुए इन सभी इकाइयों पर तत्काल रोक लगाने, उन्हें सील करने तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
संगठन के अध्यक्ष पं. संदीप दीवेदी सहित प्रभावित ग्रामीणों, किसानों और पर्यावरण प्रेमियों द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में स्पष्ट किया गया है कि आसन झील, जो यमुना और आसन नदी के संगम पर स्थित है, एक बेहद संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र है। एनजीटी ने इस क्षेत्र की सुरक्षा के लिए 10 किलोमीटर की हवाई परिधि में किसी भी प्रकार के खनन कार्य और इससे जुड़ी गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है। इसके बावजूद आसन झील से महज 5 किलोमीटर से भी कम दूरी पर ग्राम ढकरानी में यमुना नदी के तट पर ये लगभग 20 स्टोन क्रशर अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं, जिससे अपूरणीय पर्यावरणीय नुकसान हो रहा है।
पत्र में विस्तार से बताया गया है कि इन क्रशरों की स्थापना के लिए सैकड़ों हरे फलदार वृक्षों का अवैध कटान किया गया और सैकड़ों बीघा कृषि भूमि को पूरी तरह उजाड़ दिया गया। अधिकांश क्रशरों के आसपास कोई बाउंड्री वॉल नहीं है और धूल नियंत्रण के लिए हरे पेड़ों की कोई पंक्ति भी नहीं लगाई गई है। दिन-रात चलने वाले इन क्रशरों से निकलने वाली धूल के गुबार से ढकरानी गांव के निवासियों और उत्तराखंड जल विद्युत निगम की आवासीय कॉलोनी में रहने वाले लोगों को सांस की बीमारियां और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो रही हैं। तेज शोर से स्कूली बच्चों की नींद और स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
क्रशरों से निकलने वाला दूषित पानी बिना किसी सेफ्टी टैंक या रिसाइक्लिंग व्यवस्था के सीधे किसानों के खेतों में बहाया जा रहा है, जिसके कारण खेती पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है और स्थानीय किसानों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
खनिज परिवहन के लिए ओवरलोड सैकड़ों वाहन रोजाना उत्तराखंड जल विद्युत निगम की 1960 के दशक की पुरानी शक्ति नहर और क्षतिग्रस्त पुलों से गुजर रहे हैं।
माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल ने भारी वाहनों के आवागमन पर सख्त प्रतिबंध लगाया हुआ है, खासकर ढकरानी मुख्य शक्ति नहर पुल का रेट्रोफिटिंग कार्य हाल ही में पूरा हुआ था और उसकी भार क्षमता से अधिक वाहनों पर रोक है, लेकिन इन आदेशों की खुली अवहेलना हो रही है, जिससे पुलों को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
दिन-रात खनिज से लदे ट्रक ढालीपुर मार्ग से आसन झील से महज 50 मीटर की दूरी से गुजर रहे हैं, जिससे रामसर साइट में रहने वाले प्रवासी पक्षियों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो रही है। इससे लगते रिजर्व फॉरेस्ट में दुर्लभ जीव-जंतु और यमुना-आसन नदी में मौजूद जलजीवों का जीवन खतरे में पड़ गया है। यह उत्तराखंड जल विद्युत निगम की राष्ट्रीय धरोहर और विश्व बैंक पोषित परियोजना को भी खतरे में डाल रहा है।
स्टोन क्रशर स्थलों पर 30-40 फीट गहरे गड्ढे खोदकर रात्रि में यमुना नदी से मशीनी खनन किया जा रहा है, जो माननीय उच्च न्यायालय के यमुना-गंगा नदियों में मशीनी खनन पर लगाए गए प्रतिबंध की स्पष्ट अवहेलना है और राज्य के खनिज राजस्व की भारी लूट का कारण बन रहा है।
शिकायत में मुख्य सचिव उत्तराखंड सरकार, प्रधान सचिव पर्यावरण एवं वन विभाग, अध्यक्ष उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राष्ट्रीय हरित अधिकरण नई दिल्ली, पुलिस अधीक्षक देहरादून सहित सभी संबंधित अधिकारियों को प्रतिलिपि भेजी गई है। संगठन ने विनम्र निवेदन किया है कि प्रदेश हित, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय धरोहर की रक्षा के लिए इन अवैध स्टोन क्रशरों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो तथा एनजीटी एवं उच्च न्यायालय के सभी आदेशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
पत्र के साथ उच्च न्यायालय के पुलों संबंधी आदेश की प्रति और प्रभावित क्षेत्र की फोटोग्राफ्स भी संलग्न की गई हैं।
स्थानीय किसान, ग्रामीण और पर्यावरण कार्यकर्ता उम्मीद जता रहे हैं कि जिला प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर तुरंत जांच शुरू करेगा और आसन वेटलैंड तथा यमुना नदी की पारिस्थितिकी को बचाने के लिए निर्णायक कदम उठाएगा।