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बिलासपुर हाई कोर्ट का यह फैसला उन सभी शिक्षकों के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है जो लंबे समय से 'ऑनलाइन अटेंडेंस' के नाम पर अपनी निजता (Privacy) को ले

बिलासपुर हाई कोर्ट में हुई इस सुनवाई के कुछ और अहम पहलू जो आपको जानने चाहिए:
​1. लोकेशन ट्रैकिंग पर आपत्ति
​शिक्षकों की मुख्य चिंता यह थी कि VSK (Vidya Samiksha Kendra) और इसी तरह के अन्य सरकारी ऐप्स चौबीसों घंटे लोकेशन एक्सेस मांगते हैं। कोर्ट में यह दलील दी गई कि ड्यूटी के बाद भी शिक्षक की लोकेशन को ट्रैक करना या उसके निजी डेटा तक ऐप की पहुंच होना उसकी पर्सनल लाइफ में दखल है।
​2. "अपना मोबाइल, अपना डेटा"
​याचिकाकर्ताओं ने यह तर्क भी दिया कि सरकार ने उन्हें न तो मोबाइल फोन उपलब्ध कराए हैं और न ही इंटरनेट के खर्च के लिए कोई भत्ता (Allowance) दिया जाता है। ऐसे में निजी संपत्ति (Personal Mobile) का उपयोग सरकारी कार्य के लिए अनिवार्य करना कानूनी रूप से गलत है।
​3. विभाग की सख्ती पर लगाम
​स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव और संचालक को इस मामले में नोटिस जारी किया गया है। कोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद अब बिलासपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में विभाग के अधिकारी किसी भी शिक्षक पर 'ऑनलाइन हाजिरी' के लिए दबाव नहीं बना पाएंगे।
​वर्तमान स्थिति:
​पुरानी व्यवस्था: शिक्षक अभी स्कूलों में रजिस्टर पर हस्ताक्षर करके अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकेंगे।
​अगली कार्रवाई: कोर्ट ने राज्य शासन से जवाब मांगा है कि वे शिक्षकों की निजता की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठा रहे हैं।
​एक मजेदार बात: यह मामला अब चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि यह सवाल उठाता है कि "डिजिटल इंडिया" के दौर में कर्मचारी की प्राइवेसी और ऑफिस के काम के बीच की रेखा कहाँ होनी चाहिए।

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