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डीएचआर–आईसीएमआर की चार दिवसीय कार्यशाला संपन्न, बायोमेडिकल विज्ञान में ट्रांसडिसिप्लिनरी शोध पर हुआ गहन मंथन

खतौली। Department of Health Research (डीएचआर) एवं Indian Council of Medical Research (आईसीएमआर) के तत्वावधान में Chaudhary Harbans Singh Kanya Degree College, मुबारिकपुर तिगाई, खतौली में 12 से 15 फरवरी तक चार दिवसीय कार्यशाला का आयोजन उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। कार्यशाला का विषय था— “बायोमेडिकल विज्ञान में ट्रांसडिसिप्लिनरी दृष्टिकोण: नेटवर्क फार्माकोलॉजी, रोग मॉडलिंग और आणविक तकनीकें।” कार्यक्रम का उद्देश्य छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों और युवा शिक्षकों को आधुनिक जैव-चिकित्सा अनुसंधान की उन्नत एवं बहुविषयक तकनीकों से परिचित कराना रहा। कार्यशाला का उद्घाटन सत्र गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ, जिसमें विशेषज्ञों ने वर्तमान समय में चिकित्सा अनुसंधान की बदलती प्रकृति पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि आज का बायोमेडिकल शोध केवल पारंपरिक प्रयोगशाला पद्धतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जैव-सूचना विज्ञान, कंप्यूटेशनल विश्लेषण, डेटा मॉडलिंग और आणविक जीवविज्ञान का समन्वय आवश्यक हो गया है। ट्रांसडिसिप्लिनरी दृष्टिकोण से ही जटिल रोगों की बेहतर समझ और प्रभावी उपचार रणनीति विकसित की जा सकती है। मुख्य वक्ताओं के रूप में डॉ. गीतांजलि सगीना, डॉ. अमृतेश रंजन, डॉ. वेंकटेश मिश्रा, डॉ. काजल (मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज) तथा डॉ. आशु त्यागी (सी.सी.एस. यूनिवर्सिटी, मेरठ) उपस्थित रहे। विशेषज्ञों ने नेटवर्क फार्माकोलॉजी के सिद्धांतों को सरल भाषा में समझाते हुए बताया कि आधुनिक औषधि अनुसंधान में बहु-लक्ष्यीय दृष्टिकोण किस प्रकार महत्वपूर्ण होता जा रहा है। रोग मॉडलिंग पर हुए सत्र में कंप्यूटर आधारित सिमुलेशन और डेटा विश्लेषण की भूमिका पर चर्चा की गई। आणविक तकनीकों से संबंधित सत्रों में जीन अभिव्यक्ति, बायोमार्कर पहचान और प्रायोगिक शोध पद्धतियों की जानकारी दी गई। चार दिनों तक चले इस कार्यक्रम में तकनीकी व्याख्यानों के साथ-साथ इंटरैक्टिव सत्र, प्रश्नोत्तर चर्चा और छात्र प्रस्तुतियाँ भी आयोजित की गईं। प्रतिभागियों को अपने शोध कार्य प्रस्तुत करने और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिला। छात्र-छात्राओं ने बताया कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ उनके अकादमिक विकास और शोध क्षमता को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होती हैं। कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक बलबीर सिंह चौहान, आर.एस. मानव, हरबीर सिंह, श्रीनिवास तंवर एवं सुभाष रहे। आयोजन सचिव डॉ. श्रद्धा गर्ग और प्रदीप कुमार ने संपूर्ण कार्यक्रम के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यशाला संयोजक डॉ. मनीषा शर्मा के नेतृत्व में सभी सत्र सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुए, जबकि सह-संयोजक डॉ. निर्देश कुमार सिंह, मंगल सिंह सैनी एवं कोमल ने व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में सक्रिय योगदान दिया। संस्था की प्राचार्या डॉ. सारिका शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार की राष्ट्रीय स्तर की कार्यशालाएँ ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं को उच्च स्तरीय शोध वातावरण से जोड़ने का अवसर प्रदान करती हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. निधि गोयल ने विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भविष्य का चिकित्सा विज्ञान बहुविषयक सहयोग पर आधारित होगा। समापन सत्र में प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए और भविष्य में भी इस प्रकार के शैक्षणिक आयोजनों को निरंतर जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया गया। यह कार्यशाला शोध, नवाचार और ज्ञान-विनिमय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सराही गई।

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