कोचिंग संस्थानों में अब सात स्तरीय सुरक्षा कवच, थाना प्रभारी होंगे सीधे जिम्मेदार
कोचिंग संस्थानों में अब सात स्तरीय सुरक्षा कवच, थाना प्रभारी होंगे सीधे जिम्मेदार पटना। राज्य में चल रहे सभी कोचिंग संस्थानों पर अब पुलिस की सीधी निगरानी रहेगी। छात्रों की सुरक्षा, आत्महत्या की घटनाओं की रोकथाम, आपराधिक गतिविधियों पर नियंत्रण और मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने “सात लेयर सुरक्षा कवच” लागू करने का निर्णय लिया है। इस व्यवस्था में संबंधित क्षेत्र के थाना प्रभारी (SHO) को सीधे तौर पर जिम्मेदार बनाया गया है। उच्च पुलिस अधिकारियों द्वारा जारी निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि अब बिना पंजीकरण, बिना सत्यापन और बिना सुरक्षा इंतजाम के कोई भी कोचिंग संस्थान संचालित नहीं हो सकेगा। हर थाना अपने क्षेत्र के कोचिंग संस्थानों का अलग रजिस्टर रखेगा और नियमित निरीक्षण करेगा। --- क्या है “सात लेयर सुरक्षा कवच”? 1️⃣ कानूनी पंजीकरण और निगरानी सभी कोचिंग संस्थानों का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन। बिहार कोचिंग संस्थान (नियंत्रण एवं विनियमन) अधिनियम, 2010 के तहत संचालन। प्रवेश द्वार पर पंजीकरण संख्या प्रदर्शित करना अनिवार्य। 2️⃣ शिक्षकों व कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन सभी शिक्षक और कर्मियों का पुलिस वेरिफिकेशन। आपराधिक छवि वाले व्यक्तियों की नियुक्ति पर रोक। 3️⃣ सीसीटीवी कैमरा और भौतिक सुरक्षा मुख्य द्वार, गलियारों और परिसर में हाई-रेजोल्यूशन CCTV। कम से कम 30 दिन का बैकअप सुरक्षित रखना। थाना प्रभारी/एसडीपीओ द्वारा नियमित जांच। 4️⃣ बायोमेट्रिक उपस्थिति और पहचान छात्रों और स्टाफ के लिए बायोमेट्रिक अटेंडेंस। सभी छात्रों के लिए पहचान पत्र अनिवार्य। 5️⃣ आधारभूत संरचना और आपदा सुरक्षा पर्याप्त रोशनी और इमरजेंसी एग्जिट। प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) की व्यवस्था। फायर एनओसी और नियमित मॉक ड्रिल। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुसार भवन की व्यवस्था। 6️⃣ मानसिक स्वास्थ्य और परामर्श अवसाद या असामान्य व्यवहार की पहचान। जरूरत पड़ने पर अभिभावकों को तत्काल सूचना। विशेषज्ञों द्वारा काउंसलिंग और करियर गाइडेंस। 7️⃣ अभिभावक संवाद और सामाजिक निगरानी छात्रों की अनुपस्थिति या मॉक टेस्ट की जानकारी सीधे अभिभावकों को। नशीले पदार्थों के खिलाफ जागरूकता कार्यक्रम। परिवहन चालकों का सत्यापन और वाहनों की जांच। --- लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई निर्देश में यह भी कहा गया है कि यदि किसी कोचिंग संचालक या पुलिस अधिकारी द्वारा लापरवाही बरती गई तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। --- उद्देश्य क्या है? हाल के वर्षों में कोचिंग संस्थानों से जुड़े हादसों, आत्महत्या की घटनाओं और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। सरकार का उद्देश्य है कि छात्र-छात्राएं सुरक्षित और सकारात्मक माहौल में पढ़ाई कर सकें। --- यह नई व्यवस्था लागू होने के बाद कोचिंग संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी तथा छात्रों और अभिभावकों का भरोसा मजबूत होगा।