
जयशंकर सिंह भदौरिया
संवाददाता, बांका, बिहार
*नशे की दलदल में फंसती युवापीढ़ी का अंधकारमय भविष्य*
बांका,12फरवरी2026:
नशे का काला साया तेजी से युवा पीढ़ी पर मंडरा रहा है। बिहार सहित पूरे देश में ड्रग्स, शराब और अन्य नशीले पदार्थो की लत ने लाखों युवाओं को अपनी गिरफ्त में जकड़ लिया है।एक हालिया सर्वेक्षण के अनुसार,18 से 25 वर्ष की आयु वर्ग के 35 प्रतिशत युवक नशे के शिकार हैं,जो भविष्य की पीढ़ी के लिए चिंताजनक संकेत है।यह महामारी न केवल व्यक्तिगत जीवन नष्ट कर रही है, बल्कि समाज और राष्ट्र के उज्वल भविष्य को भी धूमिल कर रही है।
कारण स्पष्ट है कि शहरीकरण की चकाचौंध में छिपे तनाव, बेरोजगारी और सामाजिक दबाव युवाओं को नशे की ओर धकेल रही है।
सोशल मीडिया पर चमकते-दमकते लाइफस्टाइल की होड़ में कई युवा ड्रग्स को 'कूल' मानने लगे हैं। बिहार में गांजा, स्मैक और अफीम जैसी चीजें आसानी से उपलब्ध हो रही हैं, खासकर ग्रामीण इलाकों में।
पटना मेडिकल कॉलेज के एक अध्ययन में पाया गया कि 70 प्रतिशत नशेड़ी युवा, पारिवारिक कलह या पढ़ाई के दबाव से ग्रस्त हैं।सस्ते नशीले पदार्थ स्कूल-कॉलेजों के आसपास बिक रहे हैं जो युवाओं को अंधेरे में धकेल रहे हैं।
इस लत के परिणाम भयावह हैं जो स्वास्थ्य को चरमरा देता है जैसे लीवर फेलियर, मानसिक विकार और एड्स जैसी बीमारियां आम हो गई हैं। शिक्षा और कैरियर चौपट हो रहा है;कई प्रतिभाशाली युवा ड्राॅपआउट होकर अपराध की राह पकड़ रहे है। परिवार टूट रहा है, अपराध बढ़ रहा है।
बिहार पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, नशे से जुड़े 40 प्रतिशत अपराध युवाओं द्वारा किए जाते हैं। भविष्य गहन अंधकार के भंवरजाल में फंसता चला जा रहा है।
आर्थिक नुकसान करोड़ों में है जबकि प्रतिभाओं का विनाश हो रहा है।
सरकार और समाज को जागना होगा। अभिभावकों को बच्चों से संवाद बढ़ाना होगा। युवाओं को नशा छोड़कर खेल,योग कौशल विकास को अपनाना होगा।