दशरथ मांझी की मेहनत का इतिहास,आज के युवाओं के लिए बना बहुत बड़ा प्रेरणा स्रोत🙏🏻🙏🏻🙏🏻
ᴍᴀɴʀᴀᴊ ᴍᴇᴇɴᴀ ᴡʀɪᴛᴛᴇɴ👌🏻👌🏻💯 🌄 दशरथ मांझी – “माउंटेन मैन” की प्रेरक कहानी 📜 संक्षिप्त परिचय जन्म: 14 जनवरी 1934 गाँव: गहलौर, जिला गया (बिहार) निधन: 17 अगस्त 2007 प्रसिद्ध नाम: “माउंटेन मैन” 🪨 क्या किया उन्होंने? दशरथ मांझी ने अकेले अपने हाथों से 22 साल (1960–1982) तक पहाड़ काटकर रास्ता बनाया। लंबाई: लगभग 110 मीटर चौड़ाई: लगभग 9–10 मीटर ऊँचाई: लगभग 7–8 मीटर इस रास्ते से गहलौर गाँव से वजीरगंज की दूरी 55 किमी से घटकर लगभग 15 किमी रह गई। ❤️ क्यों बनाया रास्ता? कहा जाता है कि उनकी पत्नी फगुनिया देवी पहाड़ पार करते समय गिर गईं। समय पर अस्पताल न पहुँच पाने के कारण उनकी मृत्यु हो गई। इस दर्द ने मांझी को संकल्प दिया — “अब इस पहाड़ को तोड़कर ही दम लूंगा।” और उन्होंने हथौड़ा और छैनी से असंभव लगने वाला काम कर दिखाया। 💪 संघर्ष और तिरस्कार शुरुआत में लोग उन्हें पागल कहते थे। आर्थिक तंगी, भूख, गर्मी-बरसात — सब झेला। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 🏆 सम्मान बिहार सरकार ने उनके काम को मान्यता दी। उनकी कहानी पर फिल्म बनी — “मांझी: द माउंटेन मैन” (2015) आज वे मेहनत, दृढ़ निश्चय और प्रेम के प्रतीक माने जाते हैं। 🌟 प्रेरणा क्या मिलती - दशरथ मांझी की कहानी हमें सिखाती है: हालात बड़े नहीं होते, हौसले बड़े होते हैं। अकेला व्यक्ति भी समाज में बदलाव ला सकता है। सच्चा प्रेम और दृढ़ संकल्प पहाड़ भी झुका देता है। दशरथ मांझी को व्यक्ति था जिन्होंने पूरे पर्वत को काटकर अपनी कठोर मेहनत से रास्ता बनाया इससे आज से युवाओं को यह प्रेरणा देता है कि व्यक्ति मेहनत के द्वारा कुछ भी प्राप्त कर सकता है🎯🎯🎯🎯