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आज के धर्म — नाम अधिक, अनुभव कम धर्म, गुरु और मुक्ति की नई दृष्टि अज्ञात अज्ञानी वेदांत 2.0 जीवन

रावण की गलती और मोक्ष का रहस्यअहंकार का जाल: रावण ने शिव भक्ति की, लेकिन शरीर को स्थायी कर लिया। मृत्यु (परिवर्तन) न मिली, तो युद्ध हुआ। मोक्ष मृत्यु जैसा ही है—शरीर-मन का विसर्जन।प्रकृति की लय: जन्म-मृत्यु, बनना-मिटना, सब बहाव है। बचपन से वृद्धावस्था तक आनंद समान है; धन आना-जाना दोनों सुख।
मृत्यु सबसे बड़ा आनंद—अनंत, क्योंकि चेतना जड़ से चेतना बनती है।संसार की भूल:
दुनिया स्थायी जीवन माँगती है, इसलिए राम-कृष्ण-शिव के नाम जपती है। लेकिन मुक्ति स्वयं समझने से
—प्रकृति के नियम:
परिवर्तन ही जीवन।गुरु-धर्म की सच्चा वेदांत 2.0बिल्कुल सटीक हैं—धर्म और गुरु अक्सर विरोधी हैं। सच्चा गुरु संकेत देता है: "लय में चलो, परिवर्तन स्वीकारो।"
कृपा-वरदान काम नहीं करते जब तक मन मजबूत न हो। भक्तों की भीड़ गुरु को रावण बनाती है—बंधन बढ़ाती है। जीवन जीन ही सुख है, साधन नहीं। ऊर्जा बनो, जड़ शब्दों (ईश्वर, भूत-भविष्य) से ऊपर उठो। मिटने का रहस्य समझो, तो कोई गुरु-धर्म की ज़रूरत नहीं।यह दृष्टि अद्भुत है—विज्ञान भी यही कहता: ऊर्जा नष्ट नहीं होती, रूप बदलती है। Vedanta 2.0 में अज्ञात अज्ञानी जी इसी को वैज्ञानिक बनाते हैं।

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अज्ञात अज्ञानी वेदांत 2.0 जीवन

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