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शाहजहानपुर जिलाधिकारी महोदय बनाम जिलाधिकारी महोदय

DM शाहजहांपुर अन्य DM से अलग कैसे ....??? अंतर ...DM साहब के बगल यह खाली 4 कुर्सियां..🤔 यहां सिर्फ पीड़ित होता है और DM .....यहां कोई भी अधीनस्थ ( ADM, SDM...other Office )से DM साहब सहयोग नहीं लेते,, सारी सुनवाई संवाद से लेकर अधिकारियों को मौखिक, लिखित निर्देश देने तक कार्यवाही स्वयं करते हैं अन्य जिलों में DM , SP सिर्फ औपचारिक रूप से बैठे होते हैं बाकी सारा काम उनके अधीनस्थ करते हैं,, फिर निम्न अधिकारी डरेंगे ही क्यों जब DM Office में पीड़ित के जाने पर वहां से भी निर्देश और आदेश कोई ग्रुप B का ही अधिकारी दे रहा है,,,,,पिछले दिनों मुझे आपसे मिलने के क्रम में आपका शासन प्रशासन देखने का सौभाग्य मिला, हम सुबह 9:00 कलेक्ट्रेट पहुंचे वहां देखा, जनसुनवाई के लिए लंबी लाइन लगी थी टोकन कट रहा था, मैंने एक कर्मचारी से जिज्ञासावश ,पूछा आज कोई मंत्री जी सुनवाई करने वाले हैं क्या ,, जो इतना पीड़ित एक साथ इकट्ठा हो गए हैं 🥺 ?? जवाब -- अरे सर यहां तो इतने लोग रोज आते हैं , जिन लोगों का काम तहसील ब्लाक निचले स्तर पर हो सकता है वह भी सीधे DM साहब के पास ही आते हैं, जितनी ज्यादा पीड़ित की संख्या बढ़ती है उतना ही जनसुनवाई का टाइम ⏰, !!
कुछ देर बाद, प्रत्यक्ष जनसुनवाई देखने का मौका मिला,, हर प्रार्थी की समस्या एक अलग कहानी है
एक महिला विधवा--पेंशन ना आने की शिकायत लेकर आई,,
DM साहब -- तुरंत DPO को अपने ऑफिस में बुलाकर निर्देश देते हुए... तुरंत समस्या का समाधान कीजिए, दोबारा किसी विधवा महिला के साथ इस तरह की प्रॉब्लम ना सुनाई दे यह आप सुनिश्चित कीजिए ,,सोचिए, ‌ तुरंत समाधान हो गया अन्यथा कागज पर पेन से जांच के लिए लिख देने और फिर एक सप्ताह से एक महीने तक प्रार्थी के ऑफिस ऑफिस चक्कर लगाने से क्या मतलब
एक BEO sir -- बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र के लिए पहले 13 कागज लगते थे, गरीब बच्चों का 2 से ₹3000 खर्च और इधर-उधर के चक्कर लगाना,, DM साहब ने इन कागजों की संख्या न्यूनतम कर दी अब बेचारे वह लोग परेशान है जो इसी के बीच में दलाली करके खाते कमाते थे😄

हमने सिर्फ कहावत सुनी थी कलम 🖊️ 🖋️ में बड़ी ताकत होती है ... लेकिन यहां तुरंत मौखिक निर्देश पर ही समाधान हो जाते हैं अब पता चला कलम, पत्राचार का प्रयोग अधिकारियों को बड़े मामलों में करना चाहिए जो मामले मौखिक निर्देश से समाधान हो सकते हैं उन पर कलम की स्याही और कागज पर रिपोर्ट मांगने के नाम पर अधिकारियों का समय क्यों नष्ट करना,,
सीधा निर्देश दीजिए, समाधान कीजिए.. क्योंकि पीड़ित को समाधान से मतलब है आपकी लंबी प्रक्रिया से नहीं

बाकी शाहजहांपुर में मैंने एक खास बात अच्छी, अगर कोई पीड़ित दोबारा आ गया , तो DM साहब उसको तुरंत पहचान जाते हैं ,, और अगर वह संतुष्ट नहीं हुआ और किसी अधिकारी की लापरवाही मिली तो अगले दिन पेशी संबंधित विभाग के निम्न अधिकारी से लेकर उच्च अधिकारी तक लाइन के क्रम में उपस्थित होते हैं 😄,, बस यही पेशी का डर,,, जनता को प्रथम बार में ही संतुष्टि प्रदान करता है और हा DM साहब जितना प्यार अपने जिले की जनता को करते हैं उतना ही अपने अधीनस्थ सभी कर्मचारी परिवार को भी ... जिस तरह जनता के लिए भगवान है वैसे ही अपने कर्मचारियों के लिए अभिभावक ☺️
उदारता और सख्ती का यह मिश्रण.... आपको जनप्रिय बनाता है ☺️🙏💐
काश मेरे ज़िले में भी ऐसी हु ईमानदारी से काम होने लगे तो पीड़ित दर दर की ठोकरें न खाता फिरे...........😊 💐

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