
झालावाड़ पुलिस का बड़ा एक्शन: रोडवेज कंडक्टरों को ब्लैकमेल करने वाले 'STD' गिरोह के 8 सदस्य गिरफ्तार
राजस्थान, झालावाड़। राजस्थान रोडवेज में भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के नेटवर्क पर झालावाड़ पुलिस ने कड़ा प्रहार किया है। 'ऑपरेशन क्लीन राइड' के तहत पुलिस ने एक ऐसे संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो रोडवेज परिचालकों (कंडक्टरों) को डरा-धमकाकर उनसे मोटी रकम वसूलता था। पुलिस ने गैंग के सरगना समेत कुल 8 लोगों को हिरासत में लिया है।
छापेमारी में क्या-क्या मिला?
पुलिस की इस कार्रवाई में आरोपियों के पास से भारी मात्रा में सामग्री बरामद हुई है:
नकदी: 11 लाख 57 हजार रुपये।
गैजेट्स: लैपटॉप, मोबाइल फोन और स्पाई कैमरे।
वाहन: लग्जरी गाड़ियां।
दस्तावेज: अवैध लेनदेन और व्हाट्सएप चैट के रिकॉर्ड।
कैसे काम करता था यह गिरोह (क्या है 'STD' कनेक्शन)?
यह गैंग रोडवेज की भाषा में 'STD' के नाम से जाना जाता है। यह नाम उस दौर से पड़ा जब पीसीओ/एसटीडी के जरिए उड़नदस्तों (Vigilance Team) की लोकेशन साझा की जाती थी।
सूचना का सौदा: गिरोह के सदस्य व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए कंडक्टरों को विजिलेंस टीम की लोकेशन देते थे।
वसूली: इस जानकारी के बदले प्रति कंडक्टर 50 से 200 रुपये वसूले जाते थे। एक अनुमान के मुताबिक, एक कंडक्टर को दिन भर में 1500 से 2000 रुपये इन बिचौलियों को देने पड़ते थे।
ब्लैकमेलिंग: जो कंडक्टर पैसे नहीं देते थे, उन्हें नौकरी से हटवाने की धमकी दी जाती थी या स्पाई कैमरे से फर्जी वीडियो बनाकर उन्हें फंसाया जाता था।
राजस्व का नुकसान: इस सेटिंग के कारण कंडक्टर यात्रियों को बिना टिकट यात्रा करवाते थे, जिससे रोडवेज को कई रूटों पर 40% तक का घाटा हो रहा था।
पुलिस अधीक्षक का बयान
झालावाड़ एसपी अमित कुमार ने बताया कि गुप्त शिकायत के आधार पर यह जांच शुरू की गई थी। जांच में डिजिटल ट्रांजैक्शन (UPI) और कॉल डिटेल्स से अवैध वसूली के पुख्ता सबूत मिले हैं। गिरफ्तार आरोपियों का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी है, जिसमें पूर्व में अधिकारियों के साथ मारपीट और राजकार्य में बाधा डालने के मामले शामिल हैं।
नोट: यह गिरोह पिछले कई सालों से सक्रिय था और एक समानांतर व्यवस्था चला रहा था, जिससे सरकारी खजाने को भारी चपत लग रही थी।