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मारुल ग्राम पंचायत में 'ढापा' घोटाला? ₹9.39 लाख की मरम्मत, दो बिल और दो ठेकेदार; ग्रामीणों ने उठाए सवाल

मारुल (ता. यावल, जि. जलगांव): जलगांव जिले की यावल तहसील की मारुल ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार का एक अनोखा मामला सामने आया है। वर्ष 2022-23 में नाली और गटर स्लैब (ढापा) मरम्मत के नाम पर ₹9.39 लाख डकारे जाने का आरोप लग रहा है। रिकॉर्ड के अनुसार, एक ही काम के लिए दो अलग-अलग ठेकेदारों को सात दिनों के अंतराल में भुगतान कर दिया गया है।
​📑 दो बिल, दो ठेकेदार और रहस्यमयी भुगतान
​'मेरी पंचायत' पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, पंचायत ने एक ही प्रोजेक्ट के लिए दो अलग-अलग बिल पास किए हैं:
​पहला भुगतान (13/12/2023): ₹4,70,100 — मि. विक्की भीमराव वानखेड़े के नाम।
​दूसरा भुगतान (20/12/2023): ₹4,69,424 — अविनाश नरेंद्र सासाने के नाम।
​कुल राशि: ₹9,39,524
​हैरानी की बात यह है कि एक ही स्थल पर बने ढापे के लिए दो अलग-अलग लाभार्थियों को दिसंबर 2023 में भुगतान कर दिया गया, जबकि पोर्टल पर कार्य की स्थिति आज भी "Onset of Work" (कार्य प्रारंभ) दिखाई दे रही है।
​❗ मरम्मत के नाम पर नया निर्माण?
​सरकारी दस्तावेजों में इस काम को "Repair of Drainage Channel" (नाली मरम्मत) के रूप में दर्ज किया गया है, लेकिन तकनीकी विवरण में इसे "New/Fresh" (नया काम) बताया गया है। मौके पर मौजूद नया ढापा इस विरोधाभास की गवाही दे रहा है।
​ग्रामीणों के मुख्य सवाल:
​जब काम एक ही था, तो दो अलग-अलग ठेकेदारों को भुगतान क्यों?
​अगर काम अभी 'शुरू' ही है, तो एक साल पहले दिसंबर में भुगतान कैसे हो गया?
​क्या मरम्मत के बजट को नए निर्माण में दिखाकर कागजी हेराफेरी की गई है?
​🔍 जांच की मांग तेज
​इस पूरे मामले में सचिव और सरपंच के हस्ताक्षर होने के कारण उनकी भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। मारुल के ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस 'ढापा कांड' की निष्पक्ष तकनीकी और वित्तीय जांच की जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।
​निष्कर्ष: जनता का पैसा विकास में लगा या कागजों के हेर-फेर में, इसका जवाब अब प्रशासन को देना होगा।

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