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वाराणसी: गंगा तट पर वर्षों से जर्जर मोबाइल टावर बना प्रशासनिक लापरवाही का स्मारक, 10 जनवरी की शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं



वाराणसी (पाण्डेय घाट/शीतला घाट) — काशी की पहचान, आस्था और पर्यटन का प्रमुख केंद्र पाण्डेय घाट–शीतला घाट, दशाश्वमेध क्षेत्र में गंगा तट पर लगा एक मोबाइल टावर पिछले कई वर्षों से खराब हालत में खड़ा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि 10 जनवरी को यह मामला सामने आने और सार्वजनिक रूप से उठाए जाने के बावजूद आज तक कोई सुधार नहीं किया गया।
यह टावर गंगा घाट जैसे व्यस्त और पर्यटक-बहुल इलाके में स्थित है, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु, देश-विदेश के पर्यटक, स्थानीय नागरिक, नाविक और दुकानदार आते-जाते हैं। इसके बावजूद दूरसंचार व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है, जिससे मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवा बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार यह टावर किसी सरकारी या दूरसंचार योजना के अंतर्गत स्थापित किया गया था और प्रथम दृष्टया यह रिलायंस जियो कंपनी का प्रतीत होता है, लेकिन न तो कंपनी की ओर से स्थिति स्पष्ट की गई और न ही प्रशासन ने यह बताने की ज़रूरत समझी कि यह टावर किस विभाग के अंतर्गत आता है।
आपात सेवाओं के लिए भी खतरा
टावर के निष्क्रिय रहने से केवल आम नागरिक ही नहीं, बल्कि आपातकालीन सेवाओं पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। नेटवर्क बाधित होने की स्थिति में एम्बुलेंस, पुलिस, आपदा प्रबंधन और पर्यटक सहायता सेवाएं भी समय पर संपर्क नहीं कर पातीं, जो किसी बड़ी दुर्घटना को न्योता दे सकता है।
सुरक्षा का सवाल भी गंभीर
स्थानीय नागरिकों ने चिंता जताई है कि वर्षों से बिना निगरानी पड़ा यह टावर
कभी भी दुर्घटना का कारण बन सकता है
आंधी-तूफान या भारी बारिश में जान-माल के लिए खतरा साबित हो सकता है
यदि यह टावर किसी सरकारी योजना के तहत लगाया गया है, तो उसकी नियमित जांच और रखरखाव की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
और यदि यह निजी कंपनी का है, तो प्रशासन की चुप्पी क्यों?
जनता का सीधा सवाल – जिम्मेदार कौन?
10 जनवरी को यह मुद्दा सार्वजनिक रूप से उठाए जाने के बावजूद अब तक
न कोई निरीक्षण हुआ
न कोई नोटिस जारी हुआ
न कोई सूचना बोर्ड लगाया गया
यह स्थिति साफ तौर पर नगर निगम, जिला प्रशासन और दूरसंचार विभाग की घोर उदासीनता को दर्शाती है।
जनता की सख़्त मांग
संबंधित दूरसंचार कंपनी (संभावित रूप से जियो) तत्काल स्थिति स्पष्ट करे
नगर निगम व जिला प्रशासन संयुक्त निरीक्षण कर रिपोर्ट सार्वजनिक करे
यदि टावर अनुपयोगी है तो तुरंत हटाया जाए
और यदि आवश्यक है तो तुरंत मरम्मत कर इसे चालू किया जाए
अब बड़ा सवाल यह है कि
क्या प्रशासन किसी हादसे का इंतज़ार कर रहा है?
या फिर गंगा तट जैसे संवेदनशील और ऐतिहासिक क्षेत्र में यह टावर यूँ ही वर्षों तक लापरवाही की जीती-जागती निशानी बना रहेगा?

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