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Budget 2026: पुराने इनकम टैक्‍स सिस्‍टम को खत्‍म कर देगी सरकार या नए वाले में होगा कुछ खास जुगाड़?

Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अगले हफ्ते बजट 2026-27 पेश करेंगी, जिसमें पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था के बीच संतुलन बनाने पर जोर होगा। सरकार नई व्यवस्था को आकर्षक बनाकर लोगों को उसकी ओर प्रेरित करने की रणनीति अपनाएगी, न कि पुरानी व्यवस्था को अचानक खत्म करेगी। नई व्यवस्था में स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।

नई दिल्‍ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अगले हफ्ते केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करेंगी। इस बजट में पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था के बीच संतुलन बनाने पर खास ध्यान दिया जाएगा। सरकार का इरादा पुरानी टैक्स व्यवस्था को पूरी तरह खत्म करने का नहीं है, बल्कि नई टैक्स व्यवस्था को और आकर्षक बनाकर लोगों को उसकी ओर खींचना है। जानकारों का मानना है कि बजट में इसे लेकर कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। इसके बजाय धीरे-धीरे लोगों को नई व्यवस्था की ओर प्रेरित करने की रणनीति अपनाई जाएगी।

सीए डॉ. सुरेश सुराना ने एनडीटीवी को बताया, 'अचानक बदलाव लागू करने के बजाय सरकार से उम्मीद है कि वह नई व्यवस्था को और ज्‍यादा प्रोत्साहन देकर टैक्सपेयर्स को उसकी ओर बढ़ाना जारी रखेगी।' उन्होंने कहा कि पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह से खत्म करने की बात अभी नहीं है। लेकिन, धीरे-धीरे होने वाले बदलाव नई व्यवस्था की अपील को लगातार बढ़ा सकते हैं।

नई और पुरानी टैक्‍स व्‍यवस्‍था में फर्क

नई टैक्स व्यवस्था 2020-21 में शुरू हुई थी। इसमें टैक्स की दरें कम हैं। लेकिन, ज्यादातर टैक्स छूट (एग्‍जेम्‍पशन) नहीं मिलतीं। पिछले साल के बजट में नई व्यवस्था में स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया गया था। वहीं, पुरानी व्यवस्था में यह अभी भी 50,000 रुपये ही है। 2023-24 में लगभग 72 फीसदी (5.27 करोड़) टैक्सपेयर्स ने नई व्यवस्था को चुना। इससे पता चलता है कि सरकार की यह कोशिश रंग ला रही है।

इसके बावजूद करीब 28 फीसदी (लगभग 2 करोड़) लोग अभी भी पुरानी टैक्स व्यवस्था का ही इस्तेमाल कर रहे हैं। इसकी मुख्य वजह एचआरए (हाउस रेंट अलाउंस), होम लोन का ब्याज (2 लाख रुपये तक) और सेक्‍शन 80सी के तहत मिलने वाली बड़ी टैक्स छूटें हैं। खासकर बड़े शहरों में रहने वाले और निवेश करके बचत करने वाले नौकरीपेशा लोगों के लिए पुरानी व्यवस्था आज भी ज्यादा फायदेमंद है। ऐसा इसलिए है क्योंकि नई व्यवस्था में रिटायरमेंट सेविंग्स और हेल्थ इंश्योरेंस जैसे खर्चों पर कोई खास छूट नहीं मिलती।

टैक्सपेयर्स को उम्मीद है कि बजट 2026 में सरकार नई व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा को और बढ़ा सकती है। विशेषज्ञों का यह भी सुझाव है कि अगर नई व्यवस्था में हेल्थ इंश्योरेंस या होम लोन के ब्याज जैसी कुछ चुनिंदा टैक्स छूटों को शामिल किया जाए, तो यह और भी ज्यादा लोकप्रिय हो सकती है। कुल मिलाकर, आने वाले बजट का मकसद पुरानी व्यवस्था को बनाए रखते हुए नई व्यवस्था को टैक्सपेयर्स की पहली पसंद बनाना होगा।

क्‍या है सरकार की मंशा?
एनपीवी एंड एसोसिएट्स एलएलपी के डायरेक्ट टैक्स पार्टनर अक्षय जैन ने कहा, 'इनकम-टैक्स एक्ट, 1961 के तहत पुरानी टैक्स व्यवस्था स्ट्रक्चर्ड इन्वेस्टमेंट, हाउसिंग लोन और एलिजिबल डिडक्शन वाले टैक्सपेयर्स के लिए फायदेमंद बनी हुई है।'

नई टैक्स व्यवस्था में टैक्स की दरें कम हैं। उदाहरण के लिए अगर आपकी कमाई 5 लाख रुपये है तो नई व्यवस्था में आपको कम टैक्स देना पड़ सकता है। लेकिन, आप अगर होम लोन लेते हैं या हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते हैं तो पुरानी व्यवस्था में आपको इन खर्चों पर टैक्स छूट मिल जाती है। इससे आपका कुल टैक्स कम हो जाता है। नई व्यवस्था में ऐसी छूटें नहीं हैं। इसलिए, जो लोग इन छूटों का फायदा उठाते हैं, वे अभी भी पुरानी व्यवस्था को पसंद कर रहे हैं।

सरकार चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा लोग नई टैक्स व्यवस्था अपनाएं। इसलिए वह इसे और आसान और फायदेमंद बनाने की कोशिश कर रही है। स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाना इसी दिशा में एक कदम है। स्टैंडर्ड डिडक्शन वह राशि है जिसे आपकी कुल कमाई से टैक्स का कैलकुलेशन करने से पहले घटा दिया जाता है। इसे बढ़ाने से लोगों की टैक्स देनदारी कम हो जाती है।

भविष्य में यह संभव है कि नई टैक्स व्यवस्था में कुछ और छूटें जोड़ी जाएं। इससे यह उन लोगों के लिए भी आकर्षक हो जाएगी जो अभी पुरानी व्यवस्था का लाभ उठा रहे हैं। सरकार का टारगेट एक ऐसी टैक्स प्रणाली बनाना है जो सरल हो और लोगों को बचत करने के लिए प्रोत्साहित करे। यह देखना दिलचस्प होगा कि बजट 2026-27 में इस दिशा में क्या कदम उठाए जाते हैं।

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