
काशीपुर में विदेश नौकरी के नाम पर 6.40 लाख की ठगी, वर्क परमिट की जगह थमा दिया ई-वीजा
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काशीपुर में विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का मामला सामने आया है। एक एजेंट ने वर्क परमिट पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर दो लोगों से कुल 6 लाख 40 हजार रुपये वसूल लिए और बाद में वर्क वीजा की जगह ई-वीजा थमा दिया। पीड़ित की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी कैफे संचालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कोतवाली क्षेत्र के ग्राम नूरपुर निवासी नितिन पुत्र राकेश कुमार ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि कुछ माह पहले उसकी मुलाकात मसवासी, थाना स्वार, जिला रामपुर (उत्तर प्रदेश) निवासी कैफ मलिक से हुई थी। कैफ मलिक ने खुद को विदेश में वर्क परमिट पर नौकरी दिलाने वाला एजेंट बताया। नितिन के अनुसार, इस दौरान गांव निवासी विजेंद्र पाल सिंह, रवि कुमार और वीरपाल भी मौके पर मौजूद थे।
आरोप है कि कैफ मलिक ने बताया कि वर्क परमिट पर विदेश में नौकरी लगवाने के लिए प्रति व्यक्ति 3 लाख 20 हजार रुपये खर्च होंगे और नौकरी के दौरान 1 लाख 5 हजार रुपये मासिक वेतन मिलेगा। उसके झांसे में आकर नितिन ने 70 हजार रुपये दिए, जबकि विजेंद्र पाल के भाई वीरपाल ने 1 लाख 50 हजार रुपये, नितिन के भाई रितिक कुमार ने 80 हजार रुपये दिए। इसके अलावा वीरपाल ने अपने भाई विजेंद्र पाल के लिए नकद 1 लाख 70 हजार रुपये और रितिक कुमार ने 1 लाख 70 हजार रुपये और दिए। इस तरह कुल 6 लाख 40 हजार रुपये शुभम और लवकेश की मौजूदगी में कैफ मलिक को सौंपे गए।
पीड़ित का आरोप है कि कैफ मलिक ने वर्क परमिट वीजा की जगह उन्हें ई-वीजा दे दिया, जिसकी जानकारी पहले नहीं दी गई। इसके बाद 3 अक्टूबर 2025 को नितिन और विजेंद्र पाल को रूस भेज दिया गया। वहां पहुंचने पर उन्हें पता चला कि उनके पास वर्क परमिट वीजा नहीं, बल्कि ई-वीजा है। इस कारण दोनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा और किसी तरह वे भारत लौट सके।
भारत लौटने के बाद जब पीड़ितों ने कैफ मलिक से अपने 6 लाख 40 हजार रुपये वापस मांगे तो उसने पैसे लौटाने से साफ इंकार कर दिया और जान से मारने की धमकी भी दी।
इस मामले में सीओ दीपक सिंह ने बताया कि पीड़ित की तहरीर के आधार पर आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।