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बसंत पंचमी पर विद्यालय में मनाया अवकाश, सरस्वती पूजन नहीं: क्षेत्र में नाराजगी, BEO ने जांच के दिए निर्देश

सरसींवा/पेंड्रावन (सारंगढ़–बिलाईगढ़)। भारतीय संस्कृति में बसंत पंचमी विद्या, संस्कार और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक पर्व माना जाता है। अधिकांश विद्यालयों में इस दिन सरस्वती पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर विद्यार्थियों में ज्ञान, कला और संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाता है।
लेकिन इस बार सरसींवा से लगे पेंड्रावन स्थित हैप्पी पब्लिक स्कूल का निर्णय क्षेत्र में चर्चा और नाराजगी का विषय बन गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, विद्यालय प्रबंधन ने बसंत पंचमी के अवसर पर न तो सरस्वती पूजन किया और न ही कोई सांस्कृतिक या शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किया। इसके विपरीत, विद्यालय में सीधे तौर पर अवकाश घोषित कर दिया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बसंत पंचमी के लिए न तो राज्य शासन ने शासकीय अवकाश घोषित किया है और न ही इसे ऐच्छिक अवकाश की श्रेणी में रखा गया है। ऐसे में विद्यालय का यह कदम समझ से परे और शिक्षा के सांस्कृतिक दायित्व से विमुखता जैसा प्रतीत होता है।
क्षेत्रवासियों ने बताया कि लगभग 500 विद्यार्थियों वाले इस विद्यालय में बसंत पंचमी जैसे सांस्कृतिक महत्व के पर्व पर कार्यक्रम न कराना परंपराओं के प्रति उदासीनता दर्शाता है। वहीं विद्यालय प्रमुख के इस कथन— “इस दिन बच्चों की विशेष रुचि नहीं रहती और यह ऐच्छिक अवकाश होता है।” —को ग्रामीणों ने तथ्यों के विपरीत और भ्रामक बताया है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह निर्णय न केवल सनातन परंपराओं की अनदेखी है, बल्कि छात्रों में सांस्कृतिक चेतना विकसित करने के उद्देश्य से भी विपरीत है। लोगों ने इस मामले में शिक्षा विभाग से कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
इस संबंध में ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) बिलाईगढ़ सत्यनारायण साहू ने स्पष्ट किया—
“बसंत पंचमी के दिन किसी प्रकार के शासकीय या ऐच्छिक अवकाश की जानकारी नहीं है। यदि किसी विद्यालय ने स्वेच्छा से अवकाश घोषित किया है, तो यह गंभीर विषय है। समन्वयक को मौके पर भेजकर जांच कराई जाएगी।”
क्षेत्र में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर विद्यालय प्रबंधन ने सांस्कृतिक महत्त्व से जुड़े इस पर्व पर अवकाश क्यों घोषित किया और क्या आने वाले दिनों में विभाग ऐसी मनमानी पर कोई सख्त कदम उठाएगा।

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