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*सनातन संस्कृति से विभोर हुए ब्रिटेन के छात्र, होडल तहसील के बांसवा ग्राम के विख्यात खीर सागर मंदिर में किया दर्शन–पूजन*

कृष्ण कुमार छाबड़ा
होडल-22 जनवरी

होडल तहसील के तहत भिड़ुकी गाँव के एनवीएन स्कूल प्रबंधन के मार्गदर्शन में होडल क्षेत्र स्थित विख्यात मंदिर खीर सागर गांव बांसवा में ब्रिटेन से आए छात्रों के प्रतिनिधिमंडल ने दर्शन कर भारतीय सनातन संस्कृति की गहन अनुभूति की। मंदिर परिसर में पहुंचते ही छात्रों ने खीर सागर को सनातन संस्कृति के जीवंत प्रतीक के रूप में देखा और प्रभु एवं भक्त के अटूट, पवित्र और आत्मिक प्रेम संबंध के विषय में विस्तार से जानकारी प्राप्त की।खीर सागर मंदिर की गूढ़ व्याख्या सुनकर ब्रिटेन से आए छात्र अत्यंत प्रभावित और भावविभोर नजर आए।
इस अवसर पर छात्रों ने भारतीय व्यंजनों का स्वाद चखा और भारतीय पारम्परिक व्यंजनों के गुणों की महिमा को जाना। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन को संतुलन, शांति और करुणा के साथ जीने की प्रेरणा देती है एवं भारतीय व्यंजन स्वाद एवं स्वास्थ्य, सेहत से भरपूर हैं।
दर्शन–पूजन के उपरांत छात्रों ने ग्रामीणों द्वारा संचालित लघु उद्योगों का भी अवलोकन किया। इस दौरान उन्हें यह जानकारी दी गई कि किस प्रकार स्थानीय संसाधनों, सामूहिक प्रयास और सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र आर्थिक संपन्नता और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। छात्रों ने ग्रामीण उद्यमिता, श्रमशीलता और स्वावलंबन की भावना को भारत की सामाजिक–आर्थिक शक्ति का महत्वपूर्ण आधार बताया।
ब्रिटेन से आए छात्रों ने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों ही विश्व के लिए संतुलित, टिकाऊ और मानवीय विकास का संदेश देती हैं।
एनवीएन स्कूल में विशिष्ट अतिथि के रूप में पहुंचे राजेंद्र चौधरी अतिरिक्त महानिदेशक पत्र सूचना कार्यालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार ने इस शैक्षणिक व सांस्कृतिक भ्रमण को छात्रों के वैश्विक दृष्टिकोण और सामाजिक समझ के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।
दोनों देशों के बच्चों ने आपस में अपने अपने देश की शिक्षा पद्धति और संस्कृति जैसे विषयों पर विचारों का आदान प्रदान किया ।

एनवीएन स्कूल की प्रधानाचार्या कुसुम चौधरी ने इस सांस्कृतिक आदान–प्रदान को भारत की गौरवशाली सनातन एवं पारम्परिक विरासत को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और अतिथियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत व सम्मान किया।

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