logo

✧ शून्य की यात्रा — न सत्य, न असत्य ✧ जीवन में न कुछ अंतिम सत्य है, न कुछ अंतिम असत्य। दुःख और सुख कोई शत्रु–मित्र नहीं— वे तो जीवन के दाएँ–बाएँ कदम

✧ शून्य की यात्रा — न सत्य, न असत्य ✧

जीवन में न कुछ अंतिम सत्य है,
न कुछ अंतिम असत्य।
दुःख और सुख
कोई शत्रु–मित्र नहीं—
वे तो जीवन के दाएँ–बाएँ कदम हैं।
कभी दुःख में खड़े रहने की हिम्मत आ जाए,
तो वही दुःख
अपने आप सुख में बदल जाता है।
और जिस सुख को पकड़ लिया,
वह उसी क्षण
अस्थायी हो जाता है।
1. सुख–दुःख का चक्र
सुख और दुःख
जीवन के पहिए के दो तीलें हैं।
एक को काट दोगे—
तो पहिया चलेगा ही नहीं।
इसलिए मुक्ति
सुख से भागना नहीं,
दुःख से लड़ना नहीं—
बल्कि दोनों से मुक्त होना है।
2. शून्य से शून्य तक
हम 0 से आते हैं
और 0 की ओर लौटते हैं।
बीच की पूरी यात्रा में
ज्ञान, विज्ञान, धर्म—
सब सहायक हो सकते हैं,
सत्य नहीं।
यदि यात्रा न हो—
तो केवल मृत्यु है।
और यदि यात्रा हो—
तो जीवन।
3. आनंद, शांति, प्रेम
आनंद, शांति, प्रेम
कोई अंतिम पड़ाव नहीं हैं।
वे तीर्थ हैं—
जहाँ थोड़ी देर ठहरना है,
रुक जाना नहीं।
जो वहीं रुक गया,
वह फिर
सुख–दुःख की धूप–छाँव में
लौटने की ताक़त खो देता है।
4. धर्म का वास्तविक काम
धर्म का काम कभी यह नहीं था कि—
समाज चलाए
राजनीति बनाए
व्यापार खड़ा करे
धर्म का काम केवल इतना था कि—
मनुष्य को आनंद, शांति और प्रेम
तक पहुँचा दे।
यदि वही शांति
विज्ञान, समाज या राजनीति से मिल जाए—
तो धर्म की कोई ज़रूरत नहीं।
5. आज का धर्म
आज का धर्म
सबसे बड़ा झूठ बन गया है—
क्योंकि उसने भी
राजनीति और व्यापार का
रास्ता पकड़ लिया है।
वह मनुष्य को
शून्य की ओर नहीं ले जाता,
बल्कि
डर, लालच और अहंकार में
उलझाए रखता है।
6. वेदांत 2.0 क्या है
जिसे तुम वेदांत 2.0 कह रहे हो—
वह कोई नया धर्म नहीं है।
वह केवल इतना कहता है कि—
शांति का मार्ग कठिन नहीं
मुक्ति कल्पना नहीं
आनंद कोई पुरस्कार नहीं
और इसी सरलता के कारण
वह आज के पाखंड का
विरोधी बन जाता है।
7. प्रमाण क्या है?
यह दावा नहीं कि— “हम जानते हैं।”
यह स्वीकार है कि— “हम अज्ञानी हैं।”
लेकिन
अनुभव की धारा
सदैव एक जैसी रही है।
शब्द बदले,
भाषाएँ बदलीं,
काल बदला—
पर दुःख, सुख और आनंद
कभी नहीं बदले।
8. विरोध किसका है
यह विरोध—
किसी शास्त्र का नहीं
किसी भगवान का नहीं
किसी परंपरा का नहीं
यह विरोध केवल
पाखंड का है।
जो आत्मा, शांति और प्रेम को छोड़
सत्ता, विजय और अहंकार में
धर्म ढूँढता है—
वह अधर्म है।
9. समय का खेल
पाखंड भी
समय का ही खेल है।
जो समय को समझ लेता है,
वह उसके साथ नहीं बहता।
वह जानता है—
बुरा समय जाएगा
अच्छा समय आएगा
यह कोई आशा नहीं,
यह काल का नियम है।
10. अंतिम बात
न सत्य पकड़ो,
न असत्य से लड़ो।
बस यात्रा में ईमानदार रहो।
जहाँ शांति मिले—
वहाँ रुकना मत,
सिर्फ़ झुक जाना।
फिर आगे बढ़ जाना।
यही जीवन है।

░A░ ░P░h░i░l░o░s░o░p░h░y░ ░t░h░a░t░ ░T░r░a░n░s░f░o░r░m░s░ ░S░p░i░r░i░t░u░a░l░i░t░y░ ░i░n░t░o░ ░a░ ░S░i░m░p░l░e░ ░S░c░i░e░n░c░e░

Vedanta 2.0 Agyat Agyani

66
392 views