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ग्रेटर नोएडा इंजीनियर की नाले में डूबकर मौत: सीईओ निलंबित, योगी सरकार सख्त

ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में सड़क किनारे खुले नाले (बेसमेंट गड्ढे) में कार समेत गिरे सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की डूबने से मौत ने प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए। उत्तर प्रदेश सरकार ने तत्काल नोएडा अथॉरिटी के सीईओ एम. लोकेश को हटा दिया और एसआईटी गठित कर जांच के आदेश दिए।

घटना का विवरण
16 जनवरी 2026 की तड़के घने कोहरे में गुरुग्राम से नोएडा लौट रहे 27 वर्षीय युवराज मेहता की एसयूवी सड़क किनारे टूटी बैरिकेडिंग तोड़कर निर्माणाधीन मॉल के पानी भरे बेसमेंट गड्ढे में जा गिरी। युवराज ने कार की छत पर चढ़कर फोन की टॉर्च से मदद मांगी और पिता को फोन पर कहा, "पापा, मैं डूब रहा हूं, बचाओ," लेकिन रेस्क्यू टीमों को पहुंचने में देरी हुई। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और दमकल की मदद से सुबह शव बरामद हुआ; पोस्टमॉर्टम में डूबने और कार्डियक अरेस्ट की पुष्टि हुई।

प्रशासनिक लापरवाही
स्थल पर न बैरिकेडिंग थी, न रिफ्लेक्टर या चेतावनी साइनेज; गड्ढा वर्षों से खुला था और पहले भी ट्रक लटक चुका था। 2015 से सिंचाई विभाग ने हिंदन नदी में पानी डायवर्ट करने के लिए रेगुलेटर बनाने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन नोएडा अथॉरिटी ने अमल नहीं किया। बचाव में रस्सियां छोटी पड़ गईं, क्रेन न पहुंचीं, जिससे समय बर्बाद हुआ।

सरकार के कदम
उत्तर प्रदेश सीएम योगी आदित्यनाथ ने घटना का संज्ञान लेते हुए नोएडा अथॉरिटी सीईओ एम. लोकेश को हटा दिया और मेरठ डिविजनल कमिश्नर की अगुवाई में 3 सदस्यीय एसआईटी गठित की, जिसे 5 दिनों में रिपोर्ट सौंपने को कहा। जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार निलंबित, अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी। एसआईटी ने केमिकल एनालिसिस भी कराया।

आगे के उपाय
ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने बड़े पैमाने पर सड़क सुरक्षा अभियान शुरू किया: गड्ढे भरना, ब्लैक स्पॉट चिह्नित करना, बैरिकेडिंग, कैट्स आई रिफ्लेक्टर, स्पीड ब्रेकर लगाना। सीईओ एनजी रवि कुमार के निर्देश पर 3 दिनों में सर्वे पूरा, बिल्डरों पर सख्ती और स्ट्रीट लाइट मरम्मत। प्रत्येक वर्क सर्कल प्रभारी को शपथ पत्र देना होगा।

राजनीतिक प्रतिक्रिया
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने लापरवाही का आरोप लगाते शोक व्यक्त किया। जनता में आक्रोश फैला, पिता ने न्याय की मांग की। सरकार ने वचन दिया कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।

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